गुरुग्राम में अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट के सदस्यों से पूछताछ करती पुलिस...
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भारत से गैरकानूनी तरीके से दवाइयां खरीदकर छात्रों व मरीजों के जरिए इराक भेजने वाले दो अंतरराष्ट्रीय दवा रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। सीएम फ्लाइंग स्क्वॉयड, स्वास्थ्य विभाग और खुफिया विभाग की संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने चार इराकी नागरिकों और एक उज्बेकिस्तान की महिला को गिरफ्तार किया है।
अधिकारियों के मुताबिक 9 घंटे चली कार्रवाई में आरोपियों से 44 लाख रुपये मूल्य की 63 तरह की दवाइयों के साथ 74 लाख रुपये की नकदी बरामद की हैं। इसमें कोविड-19 में बतौर प्रायोगिक इंजेक्शन रेमडेसिवीर भी शामिल है।
सभी आरोपी इराक के छात्रों व मरीजों को लालच देकर दवाओं की तस्करी कराते थे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है की जिले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। पुलिस जांच में सामने आया कि पकड़े गए चारों इराकी नागरिक दुभाषिए (ट्रांसलेटर) का काम करते थे।
जिला ड्रग कंट्रोलर अमनदीप चौहान ने बताया कि ये दवाइयां मार्केट में सीधे तौर पर उपलब्ध नहीं हैं। जिला ड्रग कंट्रोलर को गुप्त सूचना के आधार पर सोमवार रात करीब 11 बजे सेक्टर-57 अलोहा सोसाइटी के फ्लैट नम्बर-डी/701 में तीनों एजेंसियों ने संयुक्त छापा मारा। पुलिस को मौके से 30 लाख कीमत की दवाइयां व 35 लाख नकदी बरामद हुए। पुलिस ने मौके से दो इराकी नागरिकों के साथ एक उज्बेकिस्तानी महिला को गिरफ्तार किया।
टीम की कार्रवाई के दौरान मिली सूचना के बाद इसी दौरान सेक्टर-47 स्थित पी-478 ग्राउंड फ्लोर में छापा मारा। यहां फॉर्च्यूनर गाड़ी से 39 लाख नकदी के अलावा 14 लाख कीमत की दवा बरामद की। रेमडेसिवीर के 48 इंजेक्शन बरामद किए। इसे 5400 रुपये में खरीदकर इराक में 1 लाख रुपये में बेचा जा रहा था। पूछताछ में पता चला कि बरामद दवाईयों को इराक में करीब 3 करोड़ रुपये में बेचना था।
ये हैं आरोपी
आरोपी बिना पासपोर्ट व वीजा के तस्करी का पूरा खेल चला रहे थे। आरोपियों की पहचान इराक निवासी मोहनाद, ऑथमाना, अकरम फैज व अव्सराद अल्हैंदी जबकि उज्बेकिस्तान निवासी नीलू फार के रूप में हुई। एसीपी सदर अमन यादव ने बताया कि इन दवाओं को आरोपी कहां-कहां से खरीदते थे। कब से इस रैकेट को चला रहे थे। इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं। पुलिस इसकी जांच में जुटी हुई है।