ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 थाना पुलिस ने रविवार को अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गिरोह दिल्ली एनसीआर व उत्तर प्रदेश से नए वाहन चोरी करता है। पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जबकि कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से सेंसर निष्क्रिय करने और बदलकर स्टार्ट करने का आरोपी मास्टर माइंड मोदीनगर के फरीदनगर निवासी अर्सिल अभी फरार है। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने साइट-5 स्थित बंद पड़ी फैक्ट्री से 8 एसयूवी समेत 11 नए वाहन बरामद किए हैं। आरोपी 20 वाहन चोरी कर इन्हें मध्यप्रदेश व राजस्थान ले जाना चाहते थे। पुलिस का कहना है कि यह जिले की सबसे अधिक संख्या में चोरी के वाहनों की बरामदगी है।
डीसीपी ग्रेटर नोएडा राजेश कुमार सिंह और एडिशनल डीसीपी विशाल पांडे ने बताया कि नए एसयूवी और लग्जरी वाहन चुराने वाले गिरोह की सक्रियता की पुलिस को सूचना मिल रही थी। बीटा-2 थाना प्रभारी सुजीत उपाध्याय की टीम रविवार को बल्ला की मड़ैया के पास वाहन चेकिंग में जुट गए। पुलिस टीम ने स्कार्पियो सवार चार संदिग्धों को देखकर रोक लिया। पड़ताल में पता चला कि चारों शातिर किस्म के वाहन चोर हैं।
आरोपियों की पहचान गाजियाबाद के मोती मस्जिद के पास केला भट्टा निवासी इस्माइल, वाहिद और मध्यप्रदेश नीमच जिले के द्वारिकापुरी कालोनी के फिरोज व राजस्थान चित्तौड़गढ़ जिले के चौहान खेड़ा के दिनेश चंद्र सुतार के रूप में हुई। आरोपियों ने बताया कि वह लखनऊ, गाजियाबाद, दिल्ली आदि से नए वाहन चोरी कर साइट-5 स्थित एक फैक्टरी में खड़े करते हैं। आरोपियों की निशानदेही पर दस अन्य चोरी के वाहन बरामद कर लिए गए।
पांच मिनट में चोरी, यह थी प्लानिंग और किरदार
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी इस्माइल और वाहिद पहले से वाहन चोरी की वारदात करते हैं। पूर्व में दोनों मेरठ में चोरी के वाहन के साथ पकड़े गए थे। दिसंबर में जेल से छूटकर आए थे। आरोपियों जेल से आते ही मोदी नगर के अर्सिल का साथ मिल गया। अर्सिल कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का खासा जानकार है और वह पांच मिनट में वाहन चोरी कर आरोपियों को थमा देता। उसकी मदद से आरोपियों ने ताबड़तोड़ चोरी की वारदात कीं। फिरोज खान और दिनेश चंद्र चोरी के वाहन बिकवाने में मदद कर रहे थे।
बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में चेकिंग बढ़ने से चुना एमपी-राजस्थान का रास्ता
फिरोज और दिनेश आरोपियों ने किसी व्यक्ति को 20 वाहन एक साथ देने का सौदा किया था। आरोपियों ने बताया था वह राजस्थान या मध्यप्रदेश ले जाकर उन्हें कार थमाते। वहीं, आशंका यह भी जताई जा रही है कि कारों का प्रयोग बंगाल चुनाव में किया जाना है। अधिकांश कार चोरी के बाद बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में बिक्री होने के कारण चेकिंग बढ़ने से आरोपियों ने कार राजस्थान व मध्यप्रदेश मंगाई हो। इस मामले में कार का सौदा करने वाले को भी पुलिस तलाश रही है।