संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। परी चौक, दादरी तिराहा, यमुना एक्सप्रेसवे दौड़ती डग्गामार बसें यूपी रोडवेज के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। रोडवेज को हर माह करीब 50 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कई बार निजी बस चालक रोडवेज के चालक-परिचालकों के साथ अभद्रता भी करते हैं लेकिन परिवहन विभाग और प्रवर्तन एजेंसियां ठोस कार्रवाई नहीं कर रही हैं।
ग्रेटर नोएडा डिपो से वर्तमान में 18 मार्गों पर 106 बसों का संचालन हो रहा है। इनमें अधिकतर बसें लंबी दूरी के रूटों पर चलती हैं। सीमित बसों के कारण प्रत्येक मार्ग पर औसतन पांच से छह बसें ही उपलब्ध हैं। लंबी दूरी के चलते एक बस 12 घंटे में केवल दो से तीन फेरे ही लगा पाती है। परिणामस्वरूप कई मार्गों पर रोडवेज बसों के बीच एक से डेढ़ घंटे का अंतराल हो जाता है। इसका फायदा उठाकर परी चौक पर अवैध रूप से संचालित निजी बसें यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। यहां एक के बाद एक निजी बसें खड़ी रहती हैं और लगभग हर पांच मिनट में यात्रियों को बस उपलब्ध हो जाती है।
ये बसें रोडवेज की तुलना में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक कम किराया भी वसूलती हैं। कम किराया और तुरंत बस मिलने की सुविधा के कारण बड़ी संख्या में यात्री निजी बसों का रुख कर रहे हैं, जिससे रोडवेज बसों की यात्री संख्या और आय दोनों प्रभावित हो रही हैं। ग्रेटर नोएडा डिपो के एआरएम समीना अंजुम का कहना है कि उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम और परिवहन विभाग के अधिकारियों को डग्गामार बसों की सवारियां उठाने से ग्रेटर नोेएडा डिपो को क्षति होने की जानकारी कई बार दी जा चुकी है।