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महिलाओं के हाथ में निर्णय लेने की ताकत हो तो वह पीछे मुड़कर नहीं देखतीं : लक्ष्मी सिंह

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- ओपन हाउस सेशन में पुलिस कमिश्नर ने महिला सशक्तीकरण पर रखे अपने विचार
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। अपने कार्य के दौरान हमने समाज के बहुत से आयाम देखे हैं। इसमें कुछ बहुत अच्छे थे और कई बहुत बुरे थे। हमने देखा है कि चाहे वर्किंग वूमेन हों या गांव में भैंस का दूध निकालती महिला। इन सबके हाथ में डिसीजन मेकिंग कैपिसिटी दे दी है तो फिर वह महिला कभी पीछे मुड़कर नहीं देखती। आप किसी महिला को कुर्सी दे दीजिए और फिर देखिए कि महिला उस कुर्सी के माध्यम से पूरी पीढ़ी को कुर्सी देने में सक्षम हो जाएगी।

यह बात पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने अमर उजाला की ओर से महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ओपन हाउस सेशन में कहीं। लक्ष्मी सिंह ने कहा कि महिला का स्वभाव है कि जब वह आगे बढ़ती है तो अपने साथ चार-पांच लोगों को आगे बढ़ाती है। हमारे देश में महिलाओं को हमेशा ही सम्मान दिया गया है। हमारा देश 1947 को आजाद हुआ था उस दिन से आजतक हर महिला को एक जैसा हक दिया गया है। लक्ष्मी सिंह ने कहा कि भगवान ने महिला को ऐसी ताकत दी है कि वह एक साथ कई बातें सोच सकती है। उस पर निर्णय भी ले सकती है। यही वजह है कि महिलाओं के लिए गए फैसले बहुत बैलेंस होते हैं। भारत की किसी भी नारी को कोई से भी पायदान पर खड़ा कर दीजिए उसके हाथ में एक छोटा सा ऑर्डर दे दीजिए और वह नारी उसे आगे बढ़ाकर दिखाएगी। यही वजह है कि आज दफ्तरों में, अस्पतालों में व अन्य क्षेत्रों में अधिकतर महिला अधिकारी ही निर्णय लेती नजर आ रही हैं।
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तो फेमिनिज्म की बात रही जाती है अधूरी
लक्ष्मी सिंह ने कहा कि आज स्थिति यह है कि यदि किसी जगह महिला और पुरुष का झगड़ा हो रहा है तो दूसरे लोग वहां पर मदद के लिए नहीं पहुंचते हैं। ऐसे में जो लोग फेमिनिज्म और हक बात करते हैं वह अधूरी रह जाती है। यदि महिलाओं को प्रतिष्ठा और इज्जत के साथ जिंदगी देने की क्षमता रखते हैं तो हमें जरूर देनी चाहिए।
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