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Noida News: आईसीयू की ऑक्सीजन पाइपलाइन में लगातार दूसरे दिन धमाका, अस्पताल सील

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- सेक्टर-66 स्थित मार्क अस्पताल में सोमवार को फिर हुआ हादसा, मची अफरातफरी, अस्पताल का लाइसेंस निलंबित
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माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। सेक्टर-66 स्थित मार्क अस्पताल के आईसीयू में लगातार दूसरे दिन सोमवार को भी ऑक्सीजन पाइपलाइन में धमाका हुआ। 24 घंटे में दूसरी बार हुए हादसे के बाद अस्पताल में दोबारा अफरातफरी मच गई। आईसीयू समेत अन्य वार्ड में भर्ती 11 मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया। धमाके की खबर सुनते ही सीएमओ समेत पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर लाइसेंस निलंबित कर दिया है। पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम पूरे मामले की जांच कर रही है। हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ है।

सोमवार शाम करीब पांच बजे मार्क अस्पताल के आईसीयू में एक बार फिर धमाके के बाद ऑक्सीजन पाइपलाइन फट गई। इसके बाद एसी में भी ब्लास्ट हुआ। तेज धमाकों की आवाज सुनकर अस्पताल में मौजूद लोग इधर-उधर भागने लगे। घटना के वक्त मोहम्मद बिलाल, रंगोली और सरिता आईसीयू में भर्ती थे। तेज आवाज सुनते ही तीमारदार आईसीयू में भर्ती तीनों मरीजों को लेकर बाहर की ओर भागे। बाद में तीनों को कैलाश समेत अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कराया गया। अन्य वार्डों में भर्ती अन्य आठ मरीजों को भी दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया। अस्पताल के सामने बने अग्निश्मन विभाग कार्यालय में भी धमाके की आवाज पहुंची। जिसे सुनकर दमकल कर्मियों की टीम ने मोर्चा संभाला और करीब आधे घंटे तक बचाव कार्य किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. नरेंद्र कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम घटना की जांच कर रही है। अस्पताल को सील कर लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है।
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मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे ने बताया कि अस्पताल में धमाके की गूंज थाने और फायर स्टेशन तक सुनाई दी। तुरंत फायर ब्रिगेड की गाड़ी और अग्निशमन कर्मियों को मौके पर भेजा गया। गनीमत रही कि आग नहीं लगी थी। जांच में अस्पताल के अंदर फिर से ऑक्सीजन लाइन में ब्लास्ट होने की बात सामने आई है। रविवार को जब ब्लास्ट हुआ था तब प्रबंधन ने वायरिंग समेत अन्य जांच कराई थी। ऐसे में फिर से ब्लास्ट कैसे हुआ इसकी गहन जांच की जा रही है। अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत बिजली की आपूर्ति ठप कर दी। घटना शॉर्ट सर्किट से होने की आशंका जताई जा रही है।



पहले धमाके के बाद भी सोया रहा विभाग

रविवार को शॉर्ट सर्किट से ऑक्सीजन लाइन में ब्लास्ट होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग नहीं जागा। सोमवार को एक बार फिर जब वहीं घटना दोबारा हुई तो विभाग की टीम ने कार्रवाई शुरू की। स्थानीय लोग और शहरवासी बताते हैं कि शहर के कई इलाके में ऐसे अस्पताल चल रहे हैं जिनके मानक पूरे नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम अगर रविवार की घटना के बाद ही गंभीरता दिखाती तब सोमवार को ऐसी नौबत नहीं आती।



अस्पताल सील होते देख रोने लगे प्रबंधन और कर्मी

अस्पताल के निदेशक डॉ. अनुज और उनका परिवार घटनाक्रम के बाद सदमे में हैं। सोमवार को हादसे के बाद मौके पर पहुंची मां और परिजनों को देखते हुए वह फूट-फूटकर रोने लगे। वहीं परिजन बोले कि वर्षों की कमाई एक ही पल में डूब गई। अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी भी भावुक नजर आए।



स्वास्थ्य अधिकारी बोले, गंभीर मामला

सीएमओ डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि लगातार दूसरे दिन ऑक्सीजन लाइन फटना गंभीर मामला है। पूरे सिस्टम का ऑडिट कराया जाएगा। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि ऑक्सीजन पाइपलाइन के पास से बिजली की लाइन गुजर रही है, जिससे हादसे की आशंका बढ़ जाती है।



सीसीटीवी फुटेज देखकर पुलिस ने दी थी क्लीन चिट

रविवार दोपहर 12 बजे ऑक्सीजन पाइप लाइन लीकेज होने से ब्लास्ट हो गया था। इससे ऑक्सीजन सप्लाई भी बंद हो गई थी। उसके बाद प्रबंधन ने पुलिस को आईसीयू में लगे सीसीटीवी फुटेज दिखाए। जिसमें ब्लास्ट से पहले मरीज की मौत होने का दृश्य कैद था। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में अस्पताल को क्लीन चिट दे दी थी।



तीमारदार बोले दोबारा ऐसी घटना होगी ऐसा सोचा नहीं था

आईसीयू में भर्ती मरीज मोहम्मद बिलाल के जीजा ने कहा कि उन्होंने यह विश्वास नहीं था कि दोबारा ऐसी घटना हो जाएगी। एक बार हुई घटना के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि सब ठीक हो जाएगा। अब मन में हताशा है। उन्होंने बताया कि बिलाल को पहले कैलाश अस्पताल शिफ्ट किया जहां से थोड़ी ही देर में उसे दिल्ली स्थित एम्स भेज दिया गया।
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सामने से गुजर रही हाई एक्सटेंशन लाइन

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि सामने ही हाई एक्सटेंशन लाइन गुजर रही है। इसी से ऑक्सीजन लाइन में धमाका होने की आशंका है। वहीं पुलिस का यह मानना है कि लीकेज की वजह से धमाका हुआ होगा। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि ऑक्सीजन लाइन पुरानी है। संबंधित अस्पताल समेत अन्य निजी अस्पतालों की नियमित अंतराल पर जांच होनी चाहिए ताकि आगे ऐसी घटनाएं न हों।
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