संभल। 24 कोसीय परिक्रमा में श्रद्धालुओं के बीच कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम भावुक नजर आए। बोले कि यही सनातन है, इसे कोई मिटाने वाला नहीं है। यह न मिटा है और न मिटेगा।
परिक्रमा के लिए आए यह लोग मामूली नहीं हैं, शेर के बच्चे हैं। कहा कि एक समय था जब कथाओं पर पाबंदी थी और जागरण कराने में भी मुश्किल थी, लेकिन स्थितियां बदलीं। आचार्य ने कहा महामंडलेश्वर का सानिध्य रहा तो वह समय दूर नहीं, जब संभल से विश्व की दशा और दिशा को बदलने का काम होगा। यूं तो आचार्य प्रमोद कृष्णम का भाषण धार्मिक था लेकिन उन्होंने महामंडलेश्वर यतींद्रानाथ गिरि महाराज की तरफ इशारा करते हुए कहा कि जब मैं उधर था तो भी आपका था और अब भी आपका हूं। कहा कि न चांद होगा न यह तारे होंगे लेकिन हम तुम्हारे हैं तुम्हारे रहेंगे। कहा कि सनातन से कभी समझौता नहीं किया। राम मंदिर का निमंत्रण जब कांग्रेस ने ठुकरा दिया तो मैंने भी कांग्रेस को ठुकरा दिया था। संवाद
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कल्कि धाम ऐंचोड़ा कंबोह का नाम देवदत्त नगर होना चाहिए : स्वामी यतींद्रानंद गिरि
संभल। महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि महाराज ने कहा कि कल्किधाम ऐंचोड़ा कंबोह का नाम सही नहीं है। कलियुग में भगवान देवधि देव महादेव, उनको देवदत्त नाम का अर्थ प्रदान करेंगे। इसके बाद श्रीकल्कि भगवान धरती पर धर्म की स्थापना करेंगे और धर्म ध्वजा फहराएंगे, ऐसे स्थान का नाम देवदत्त नगर होना चाहिए। महामंडलेश्वर ने इस संबंध में ग्राम पंचायत और मौके पर भाजपा के जिलाध्यक्ष हरेंद्र सिंह से शासन को प्रस्ताव भेजने का आह्वान किया। महामंडलेश्वर ने 24 कोसीय परिक्रमा समिति का दायरा बढ़ाने की भी वकालत की। कहा कि यह संभल तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, इसे पूरे उत्तर प्रदेश में फैलाओ। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के लोग इस आयोजन का हिस्सा बनें। ऐसी व्यवस्था भविष्य में होनी चाहिए। संवाद