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हिंडन का दर्द : यमुना हुई ‘लाल’ तो हिंडन चलेगी उलटी चाल

Sun, 29 May 2016 11:54 AM IST
सुशील पांडेय व मनोज कुमार/अमर उजाला, नोएडा
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तिलवाड़ा का वो स्‍थान जहां यमुना से मिलती है हिंडन - फोटो : राजन राय
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मौसम विज्ञानियों के पूर्वानुमान के मुताबिक इस वर्ष दिल्ली-एनसीआर में 106 फीसदी बारिश होगी। नदियों के विशेषज्ञों का कहना है कि औसत से छह फीसदी ज्यादा बारिश होने से अगर यमुना ने 204.83 मीटर के खतरे के लाल निशान को पार करते हुए 207 मीटर का आंकड़ा पार किया तो तिलवाड़ा में हिंडन बैक फ्लो मारेगी। यहां यमुना व हिंडन एक दूसरे से मिलती हैं। ऐसे मेें ग्रेटर नोएडा के गांवों मेें बाढ़ जैसे हालात हो सकते हैं। यही नहीं नोएडा के सेक्टरों में भी नालों के बैक फ्लो से जलभराव का खतरा हो सकता है।
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विशेषज्ञों के मुताबिक , ज्यादा बारिश में अगर तटबंधों ने साथ नहीं दिया तो नोएडा व ग्रेनो के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में होंगे। हिंडन का बैक फ्लो तो परेशान करेगा ही, नालों का ओवरफ्लो शहरी इलाकों में जलभराव का कारण बन जाएगा। यही नहीं, मानसून में हथिनी कुंड बैराज से छोड़े जाने वाले पानी पर अगर नियंत्रण नहीं रहा तो यह भी नोएडा-ग्रेटर नोएडा के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

दरअसल, 12 अगस्त 1978 को आई बाढ़ से यमुना व हिंडन एक हो गई थीं। उस समय काफी कोहराम मचा था। इसके बाद 1984 में बांध बनाया गया। हालांकि , यमुना के लाल निशान के पास पहुंचने पर हिंडन से हमेशा खतरा बना रहता है। सिंचाई विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि अगर यमुना 207 मीटर के निशान तक पहुंची तो हिंडन की उलटी चाल शुरू हो जाएगी।
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2010-11 की बारिश में मच चुका है हाहाकार
ग्रेटर नोएडा के घरबरा के ग्रामीण बताते हैं कि 2010-11 की भारी बारिश में कई गांवों में हाहाकार मच चुका है। इसकी वजह तटबंध का जगह-जगह क्षतिग्रस्त होना रहा। समय से इसकी मरम्मत नहीं की गई थी। यही नहीं अवैध रेत खनन करने वालों की वजह से कई जगह तटबंधों से रास्ते बन गए थे। पानी इन्हीं रास्तों से होता हुआ मोतीपुर, मोमना, मकनपुर, कानपुर सहित कई गावों के खेतों व घरों तक पहुंच गया। जानकारों की मानें तो उस दौरान गौतमबुद्ध नगर यूनिवर्सिटी में भी पानी घुस गया था।

खादर की जमीन पर हो रहा अतिक्रमण
यमुना खादर में अतिक्रमण बदस्तूर जारी है। जानकारों की मानें तो यहां के खादर में धड़ल्ले से सैकड़ों एकड़ में फॉर्म हाउस बनाए गए हैं। अतिक्रमण की वजह से पुलिस और सिंचाई विभाग पर सवालिया निशान लग रहा है। यही नहीं, यमुना के किनारों को भी बेहद नुकसान पहुंच रहा है। यमुना की धारा प्रभावित हो रही है।

तटबंधों की करनी होगी मरम्मत
जानकारों की मानें तो यमुना के तटबंधों को कालिंदी से ग्रेनो तक रेत माफिया हर वर्ष तबाह कर देते हैं। बरसात के बाद इस पर कोई ध्यान भी नहीं देता। ऐसे में क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत बरसात से पहले ही कर लेनी होगी। अगर ऐसा नहीं किया गया और यमुना का जलस्तर ज्यादा बढ़ा तो पानी टूटे तटबंधों के सहारे गांव व खेतों में तेजी से घुसेगा और तबाही फैलाएगा।

यहां हो सकती है बारिश से दिक्कत 
मोतीपुर, मोमना, मकनपुर, कानपुर, खांडना, चोटपुर, छिजारसी, वाजिदपुर, जलपुरा, हल्दौनी, लखनावली, सफीपुर, बिसरख, सभी पुराने और औद्योगिक क्षेत्र।

यमुना के जलस्तर का रिकॉर्ड
वर्ष==========पानी
1978========207.49 मीटर
1986=======204.33 मीटर
1996=======204.14 मीटर        
2010=======207 मीटर

ग्रामीण बोले
वर्ष 2010-11 में हिंडन के बैक फ्लो के कारण बाढ़ जैसे हालात हो गए थे। उस दौरान किसानों को काफी नुकसान हुआ था जिससे काफी लोग गांव छोड़कर सुरक्षित स्थान की ओर निकल गए थे। - सतीश, ग्रामीण

यमुना का जलस्तर बढ़ने पर हिंडन ग्रेटर नोएडा के लिए खतरा बन जाती है। हालांकि, तीन-चार वर्ष से ऐसे हालात नहीं आए, लेकिन अगर मौसम विभाग पूर्वानुमान लगा रहा है तो हमें तैयार रहना होगा। - जय सिंह, ग्रामीण

2010 में हिंडन का पानी कई गांवों में घुसा था। इससे ग्रामीणों में हाहाकार मच गया था। खादर के कई इलाके डूब गए थे। शहरी क्षेत्र में भी जलभराव की हालत थी।- रामवीर भाटी, ग्रामीण
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