नई दिल्ली-वाराणसी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी होने से देसी-विदेशी पर्यटकों और तीर्थ यात्रियों का सफर सुगम हो जाएगा। 800 किमी लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर में एयरपोर्ट के अलावा श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा, ताज नगरी आगरा, संगम नगरी प्रयागराज और श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या को भी जोड़ा जाएगा।
गौतमबुद्ध नगर का जेवर उत्तर भारत के तीर्थ और पर्यटक स्थलों के केेंद्र में स्थित है। देश की राजधानी दिल्ली, यमुना एक्सप्रेसवे, मथुरा, आगरा और राजस्थान आदि के करीब होने के कारण ही यहां नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मंजूरी मिली है। विदेशों से भारत आने वाले पर्यटकों का रुझान यहां के तीर्थ और ऐतिहासिक स्थलों की ओर अधिक होता है। अधिकांश यात्री दिल्ली, आगरा, मथुरा, अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी जाते हैं।
इसे ध्यान में रखते हुए नई दिल्ली-वाराणसी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से एयरपोर्ट के साथ अन्य तीर्थ व एतिहासिक शहरों से जोड़ने की योजना बनाई गई है। एयरपोर्ट से मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही, वाराणसी और अयोध्या जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ा जाना है। कॉरिडोर और हाई स्पीड ट्रेन के संचालन के बाद देसी-विदेशी यात्रियों को इसका पूरा लाभ मिलेगा।
हाई स्पीड ट्रेन देगी सामाजिक और आर्थिक लाभ
हाई स्पीड ट्रेन के सामाजिक और आर्थिक लाभ हैं। जापान, यूरोप और चीन इसके उदाहरण हैं। वहां हाई स्पीड ट्रेन संचालन के बाद लोगों का काफी समय बचता है। इस समय वह अन्य कामों में खर्च करते हैं। इसमें भारतीय रेल मार्ग की तुलना में कम भूमि प्रयोग होती है, जो कि किफायती है। बिजली से संचालन के कारण क्षेत्र में प्रदूषण कम होगा और इससे पर्यावरण को लाभ होगा। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस और हैम्बर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, नई हाई स्पीड लाइन से जुड़े शहरों की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अन्य की अपेक्षा 2.7 फीसदी तक की वृद्धि देखी गई है।