नई दिल्ली। दिल्ली दंगों की साजिश के सिलसिले में अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) में गिरफ्तार जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट मंगलवार को फैसला सुनाएगी। दिल्ली पुलिस ने तन्हा को दंगों की व्यापक साजिश के सिलसिले में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया था।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल एवं न्यायमूर्ति एजे भंभानी की खंडपीठ ने तन्हा की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद 18 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था। तन्हा ने निचली अदालत के 26 अक्तूबर 2020 के फैसले को चुनौती दी थी। अदालत ने उसकी जमानत याचिका इस आधार पर खारिज कर दी थी कि उसने कथित रूप से दंगों की साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई और पहली नजर में इसे सत्य मानने के लिए उचित आधार है।
हाईकोर्ट ने चार जून को तन्हा को 13 से 26 जून के बीच बीए की परीक्षा देने के लिए हिरासत में जमानत प्रदान की थी। इस दौरान उसे पुलिस हिरासत में होटल में रहकर 15 जून से शुरू होने वाली परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी।
हाईकोर्ट के समक्ष आरोपी की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल अमन लेखी, अधिवक्ता अमित महाजन एवं रजत नायर ने कहा था कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे पूर्व नियोजित थे जिसके लिए साजिश रची गई थी और तन्हा उसमें शामिल था। उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि सुरक्षित गवाहों के बयानों में भी जिक्र है कि वह दंगों की साजिश में शामिल था।
दिल्ली पुलिस ने तन्हा को दंगों की साजिश के सिलसिले में मई 2020 में गिरफ्तार किया था। उसकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल एवं अधिवक्ता सौजन्या शंकरन ने कहा था कि उन्होंने जमानत खारिज करने के फैसले को चुनौती दी है। उनका कहन था कि वह मई 2020 से हिरासत में है और केस की जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल हो चुकी है। इसके मद्देनजर उसे जमानत मिलनी चाहिए। - एजेंसी