नई दिल्ली। 1984 सिख दंगा मामले में उम्रकैद काट रहे दोषी ने मेडिकल आधार पर अंतरिम सजा निलंबन की मांग की है। दोषी ने उपचार के लिए उसकी सजा 90 दिनों के लिए निलंबित करने का आग्रह किया है। न्यायमूर्ति नवीन चावला एवं न्यायमूर्ति आशा मेनन ने दिल्ली पुलिस को याची नरेश सेहरावत की सेहत पर नए सिरे से स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
याचिका पर अगली सुनवाई पांच जुलाई तय की गई है। याची की ओर से अधिवक्ता धरम राज ओहलान ने कोर्ट को बताया कि उनका मुवक्किल जेलों में कोरोना संक्रमण के मद्देनजर भीड़ कम करने के लिए गठित हाई पावर कमेटी की सिफारिशों की रोशनी में सजा निलंबित करने या 90 दिनों पैरोल देने का आग्रह कर रहा है।
ओहलान ने कोर्ट को बताया कि नरेश सेहरावत किडनी व लिवर की बीमारी से पीड़ित है और उसकी स्थिति बेहद गंभीर है। इसके मद्देनजर ट्रांसप्लांट कराना ही अंतिम विकल्प है। जब उसका ट्रांसप्लांट नहीं हो जाता है उसे विशेष आहार लेना होगा जो जेल में रहते हुए संभव नहीं है। उसकी खराब सेहत के कारण उसे कोरोना संक्रमण होने का भी अधिक खतरा है।
याचिका का विरोध करते हुए एसआईटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा ने कोर्ट से कहा कि सेहरावत को कोरोना टीके की दोनों खुराकें लग चुकी हैं। इसके अलावा जेल में उसकी उचित देखभाल हो रही है। इसका विरोध करते हुए ओहलान ने कहा कि कोरोना का टीका लगवाना बचाव की सौ फीसदी गारंटी नहीं है। वहीं चीमा ने कहा कि जेल में दोषी का पूरा उपचार किया जा रहा है और फिलहाल उसे राहत देने के लिए कोई इमरजेंसी नहीं है।
सिख दंगा मामलों की दोबारा जांच के लिए केंद्रीय गृहमंत्रालय ने एसआईटी बनाई थी। इस जांच के आधार पर अदालत ने 1984 दंगों में दो लोगों की हत्या के सिलसिले में यशपाल सिंह को फांसी तथा नरेश सेहरावत को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। एसआईटी जांच के बाद किसी मामले में सुनाई गई ये पहली सजा थी। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील लंबित है। वहीं यशपाल का डेथ रेफरेंस भी हाईकोर्ट में लंबित है। - एजेंसी