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आत्मसर्पण से पहले सभी कैदियों के टीकाकरण पर सरकार से जवाब तलब

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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने आत्मसमर्पण करने से पहले जमानत या पैरोल पर बाहर गए सभी कैदियों के टीकाकरण की मांग करने वाली दो याचिकाओं पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याची ने तर्क रखा कि जेलों के अंदर संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए टीकाकरण जरूरी है। अदालत ने कहा कि इस मामले में तुरंत कार्रवाई की जाए।
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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष दिल्ली सरकार की और से पेश राहुल मेहरा ने तर्क रखा कि कि चिंता करने की कोई बात नहीं है क्योंकि सब कुछ नियंत्रण में है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि जेलों में कोविड-19 का कोई प्रकोप नहीं हुआ है। अदालत ने सरकार को शपथपत्र सहित जेल में संक्रमण रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी पेश करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाएं जमानत, पैरोल या फर्लो पर बाहर रहने वाले कैदियों को लंबी अवधि के लिए बाहर रखने का बहाना दिखाई देती हैं । पीठ ने कहा कि अपराध करते समय ऐसे व्यक्तियों को पता होना चाहिए कि अदालत द्वारा जेल भेजे जाने पर सब क्या हो सकता है।
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दो याचिकाओं में से एक 63 वर्षीय महिला को हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाने के लिए पेश किया गया है, जिसने मांग की है कि सभी कैदी, विशेष रूप से 60 साल से ऊपर के जो लोग जमानत, पैरोल या फर्लो पर बाहर थे, उन्हें उनके आत्मसमर्पण से पहले टीका लगाया जाए। हत्या के मामले में सजा काट रही 63 वर्षीय महिला की याचिका पर अदालत ने यह टिप्पणी की। महिला ने जेल में बंद अन्य कैदियों व जेल स्टाफ को वैक्सीन देने की मांग की गई है।
इसी तरह की याचिका में चार वकीलों अभिलाषा श्रावत, प्रभाष, कार्तिक मल्होत्रा और मानव नरूला ने भी जमानत पर बाहर सभी कैदियों को टीकाकरण की व्यवस्था और सुविधा प्रदान करने की मांग की है।
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