नई दिल्ली। अंतिम वर्ष की ऑनलाइन परीक्षा संबंधी याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के दौरान डीयू के कई छात्रों को हाईकोर्ट के गुस्से का सामना करना पड़ा। हाईकोर्ट ने छात्रों के गलत पहनावे तथा स्क्रीन पर आ रहे उनके मैसेज लगातार स्क्रीन पर पॉप अप होने पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें माइक व वीडियो कैमरा बंद करने का निर्देश दिया।
नियमानुसार सुनवाई के दौरान जिरह करने वाले वकीलों तथा जजों के अलावा सभी के माइक तथा कैमरा ऑफ रहते हैं।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह ने छात्रों को अपने कैमरे ऑफ करने के लिए कहा क्योंकि उनके कपड़े कोर्ट की सुनवाई में शामिल होने के लिए उपयुक्त नहीं थे। इसके अलावा लगातार छात्रों के मैसेज चैट बॉक्स में आते रहे। इनमें से एक छात्र ने लिखा कि वह डीयू से नफरत करता है। वह डीयू का चुनाव अपने कॉलेज के तौर पर करने की सजा भोग रहा है।
कोर्ट ने जब पूछा कि यह संदेश कौन भेज रहा है और उन्हें सुनवाई में शामिल होने के लिए वीडियो लिंक किसने दिया। तब एक वकील ने कहा कि यह कोई छात्र होगा। वकील ने कहा कि उसने छात्रों को लिंक नहीं दिया है, उन्होंने जरूर कोर्ट मास्टर से लिया होगा। इसके बाद वकील ने चैट बॉक्स में एक मैसेज लिखकर छात्रों को अपने कैमरे ऑफ करने के लिए कहा।
कोर्ट ने जब वकील से प्रत्येक पेपर में मिलने वाले अंकों के बारे में पूछा तो छात्रों ने चैट बॉक्स में कई मैसेज लिख दिए। एक छात्र ने लिखा कि यह एलएलबी के लिए तीन घंटे हैं जिसमें अपलोडिंग तथा स्कैनिंग शामिल हैं। 100 नंबर के पेपर में 25-25 अंक के चार सवाल होते हैं। वहीं एक अन्य छात्र ने कहा कि डीयू एलएलबी को पीजी कोर्स मानता है और हमें दो घंटे में 100 नंबर का पेपर करना पड़ता है जबकि अन्य सामान्य यूजी कोर्स में 75 अंक का पेपर करने के लिए तीन घंटे मिलते हैं।