नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने एक अमेरिकी भारतीय युवक के आग्रह पर उससे जुड़े ड्रग केस के फैसले का लिंक हटाने का निर्देश गूगल को दिया है। इस मामले में युवक को बरी कर दिया गया था। युवक ने अपनी याचिका में कहा कि फैसले का लिंक ऑनलाइन मौजूद होने के कारण उसे अमेरिका में अच्छी जॉब नहीं मिल पाई।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने गूगल के अलावा वेब पोर्टल इंडियन कानून को भी 20 अगस्त को होने वाली सुनवाई तक जजमेंट का एक्सेस ब्लॉक करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने जजमेंट का लिंक स्थायी रूप से हटाने की युवक की मांग पर केंद्र सरकार, गूगल और इंडियन कानून को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
अदालत ने कहा कि किसी अदालती आदेश को ऑनलाइन प्लेटफार्म से हटाया जा सकता है या नहीं, इस मुद्दे में जहां एक आरोपी की निजता का सवाल है तो वहीं दूसरी ओर सूचना का अधिकार और न्यायिक अभिलेखों में पारदर्शिता का प्रश्न जुड़ा है। इन दोनों मुद्दों की अदालत को पड़ताल करनी होगी।
अदालत ने अपने 12 अप्रैल के आदेश में कहा कि हालांकि याची इस मामले में बरी हो गया था लेकिन उसे, उसके सामाजिक जीवन व रोजगार के अवसर को अपूर्णीय क्षति हुई होगी। इसलिए वह कानूनी मुद्दों के लंबित होने तक अंतरिम राहत पाने का हकदार है। इसलिए अगली तारीख तक 29 जनवरी 2013 के उक्त फैसले का लिंक हटाने का निर्देश गूगल और जजमेंट एक्सेस ब्लॉक रखने का निर्देश इंडियन कानून को दिया जाता है। केंद्र को इस आदेश की अनुपालना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है।
याचिका के अनुसार याची 2009 में भारत आया था। उसके खिलाफ नारकोटिक्स का केस दर्ज किया गया था। निचली अदालत ने उसे अप्रैल 2011 में बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने फैसले के खिलाफ दिल्ली पुलिस की अपील जनवरी 2013 में खारिज कर दी थी। हालांकि फैसले का लिंक ऑनलाइन मौजूद था।
इसके कारण याची को अच्छी जॉब नहीं मिल सकी। उसने गूगल व इंडियन कानून को ये लिंक हटाने के लिए कानूनी नोटिस भेजा था। जब उन्होंने लिंक नहीं हटाए तो हाईकोर्ट में याचिका दायर की। - एजेंसी