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Noida News: प्लॉट विवाद में राहत नहीं, कोर्ट ने खारिज की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका

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अदालत से
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। औद्योगिक प्लॉटों के स्वामित्व और धोखाधड़ी से मामले में जिला न्यायालय ने शिकायतकर्ता को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने आपराधिक पुनरीक्षण को खारिज करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय द्वारा पुलिस की अंतिम रिपोर्ट (एफआर) स्वीकार करने के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने माना कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर विवाद मुख्य रूप से दीवानी प्रकृति का प्रतीत होता है और इसमें आपराधिक रंग देने का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
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मामले में सतिश कुमार पवार ने विशाल अग्रवाल के खिलाफ वर्ष 2024 में थाना कासना में धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, धमकी और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसने वर्ष 2007 में यूपीएसआईडीसी के तीन औद्योगिक प्लॉट करीब 1.22 करोड़ रुपये में खरीदे थे। भुगतान के बाद मूल दस्तावेज भी उसे सौंप दिए गए थे, लेकिन बाद में आरोपी ने प्लॉटों पर अपना दावा बनाए रखते हुए दस्तावेज खोने का आवेदन दिया और कथित रूप से प्लॉट किसी अन्य के नाम स्थानांतरित करने का प्रयास किया। पुलिस की प्रारंभिक विवेचना में आरोप सही पाए गए थे, लेकिन दोबारा विवेचना कराकर प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अंतिम रिपोर्ट लगवा दी गई। दूसरी ओर प्रतिवादी विशाल अग्रवाल ने अदालत में दलील दी कि पूरा विवाद संपत्ति के स्वामित्व और दस्तावेजों से जुड़ा दीवानी विवाद है। इसी संपत्ति को लेकर सिविल कोर्ट में वाद लंबित है।शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत कुछ दस्तावेजों में हेरफेर और ओवरराइटिंग के संकेत हैं।
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