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इंजीनियर युवराज मौत केस: आरोपियों को नहीं मिली राहत, विवेचक को लगी फटकार; कोर्ट ने कहा- पूरी तैयारी के साथ आएं

Tue, 27 Jan 2026 04:36 PM IST
राहुल तिवारी माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा

सार

ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 सॉफ्टवेयर इंजीनियर हादसे में सीजेएम अदालत ने एमजेड विजटाउन बिल्डर कंपनी के डायरेक्टर अभय कुमार की हिरासत दो फरवरी तक बढ़ा दी। वहीं लोटस ग्रीन के आरोपियों की कस्टडी 29 जनवरी तक बढ़ाई गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने विवेचक को कड़ी फटकार लगाई।
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युवराज केस में कोर्ट का फैसला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ग्रेटर नोएडा सेक्टर-150 के पास सॉफ्टवेयर इंजीनियर हादसे के मामले में मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने मामले में एमजेड विजटाउन बिल्डर कंपनी के डायरेक्टर अभय कुमार की न्यायिक हिरासत दो फरवरी तक वहीं लोटस ग्रीन रवि बंसल, सचिन करनवाल की न्यायिक हिरासत 29 जनवरी तक बढ़ाई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान विवेचक को भी जमकर फटकार लगाई है। अगली बार पूरी तैयारी के साथ आने को कहा है।

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मामले में दोपहर तीन बजे के बाद रिमांड पर सुनवाई है। लोटस ग्रीन बिल्डर के आरोपी पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि गिरफ्तार किए गए आरोपी न तो कंपनी के डायरेक्ट, न मुख्य कर्ताधर्ता है। आरोपी छोटे कर्मचारी मुनीम है। आरोपी किसी उच्च पदों पर तैनात नहीं है। आरोपी वेतन पर काम करते हैं। इन्हें पुलिस की ओर से जल्दबाजी में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने बस ऊपर के अधिकारियों का दबाव और बिना जांच पड़ताल के आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

आरोपियों को महज पुलिस और प्रशासनिक दबाव के कारण ऊपर के अधिकारियों के कहने पर जेल भेजा गया है। इस मामले में कंपनी की ओर से अदालत को 500 पेज की रिपोर्ट भी दी गई है। बावजूद जल्दबाजी में पुलिस की ओर से निर्णय लेकर गिरफ्तारी की गई। मामले में जीपीएस युक्त सेटेलाइट इमेज भी उपलब्ध कराई गई थी। जिसमें बताया गया कि जब 2021 में नाला टूटा था। इसके बाद से इसमें पानी भर रहा है। इस संबंध में पहले ही नोएडा प्राधिकरण को सूचना दी थी।

इसकी मरम्मत के लिए फंड भी आया था। मगर मरम्मत के लिए कुछ नहीं हुआ। पुलिस की ओर से आरोपियों की गिरफ्तारी का कारण और सही आधार नहीं बताया गया। ना सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन किया। जो गिरफ्तार किए हैं वह कंपनी के छोटे कर्मचारी है। बड़े बिल्डर और मालिक अब भी फरार है। इसलिए रिमांड निरस्त कर नियमित जमानत दी जाए।

इस मामले में अदालत ने मौके पर मौजूद विवेचक से सवाल किए। इसपर विवेचक की ओर से कहा गया कि 500 पन्नों की रिपोर्ट होने के कारण उसे इसे पढ़ने के लिए समय नहीं मिल पाया। इसलिए कुछ दिन का और वक्त दिया गया। इसपर आरोपियों के अधिवक्ताओं ने विरोध किया। उन्होंने कहां कि जब विवेचना ही पूरी नहीं हुई तो किस आधार पर छोटे कर्मचारियों को जेल में रखा जा रहा है। इस मामले में अबतक कुछ नहीं किया गया।

हादसे के बाद मामले को आनन-फानन में छोटे कर्मचारियों की गिरफ्तारी की गई। पुलिस की ओर से आरोपियों का अबतक भूमिका की जांच नहीं की जा सकी है। मामले की जांच चल रही है। बावजूद जल्दबाजी में गिरफ्तारी की गई है। इस पर अदालत ने विवेचक को फटकार लगाई। समय पर आरोपियों की ओर से दी गई रिपोर्ट को नहीं पढ़ने पर जमकर फटकारा। कहां कि पिछले सुनवाई के दौरान उन्हें अगली बार के लिए पूरी तैयारी के सात आने को कहा था लेकिन विवेचक की ओर से ऐसा नहीं किया जा सका।

इस कारण अदालत ने लोटस ग्रीन के मामले में सुनवाई के लिए 29 जनवरी-2026 की तारीख दी है। ऐसे में दोनों आरोपियों की दो दिन न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई है। वही एमजेड विजटाउन बिल्डर कंपनी के डायरेक्टर अभय कुमार के अधिवक्ताओं ने भी आरोपी कि गिरफ्तारी कर उसे जेल भेजने के दौरान नियमों का पालन नहीं करने की दलील दी। इस कारण अदालत ने मामले में सुनवाई के लिए दो फरवरी-2026 की तारीख दी है। इस कारण आरोपी की छह दिन की न्यायिक बढ़ाई गई है। अदालत ने अगली बार विवेचक को पूरी तैयारी के साथ आने के लिए कहा है। पुलिस से दो दिन में रिपोर्ट में आगे है। अदालत की ओर आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने के लिए कहा गया है।
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फरार बिल्डर कंपनी के खिलाफ कुर्की की तैयारी
सॉफ्टवेयर इंजीनियर हादसे के मामले में लोट्स ग्रीन बिल्डर के मालिक निर्मल सिंह की गिरफ्तारी अबतक नहीं हो सकी है। इस कारण नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस की बिल्डर कंपनी की संपत्ति के खिलाफ कुर्की की तैयारी कर रही है। पुलिस की ओर से आरोपी बिल्डर के नजदीकी लोगों और सहयोगियों से भी पूछताछ की गई है। बिल्डर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बैंक खातों की भी डिटेल निकलवाई गई है। मगर बिल्डर के बारे में कुछ पता नहीं चल सका है। आरोपी के परिजन से भी पूछताछ की जा रही है। मामले में वांछित अन्य आरोपी बिल्डर निर्मल सिंह के अलावा मनोज कुमार, संजय कुमार, अचल वोहरा की गिरफ्तारी अबतक नहीं हो सकी है।

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