गिरिराज पर्वत परिक्रमा श्राइन बोर्ड के गठन पर एनजीटी में फिर सुनवाई
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनजीटी में 22 दिसंबर को होगी सुनवाई
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। मथुरा-वृंदावन में गोवर्धन क्षेत्र और गिरिराज पर्वत के पर्यावरण संरक्षण ओर आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए श्राइन बोर्ड के गठन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने फिर से सुनवाई शुरू की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नाथद्वारा मंदिर बोर्ड को सुनवाई में एनजीटी ने पक्षकार बना दिया है। नाथद्वारा बोर्ड ने श्राइन बोर्ड के गठन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। 22 दिसंबर को इस मामले में एनजीटी दोबारा सुनवाई करेगा।
सात दिसंबर 2023 को इस प्रकरण में एनजीटी के चेयरमैन प्रकाश श्रीवास्तव, सदस्य जस्टिस सुधीर अग्रवाल, डॉ. ए सेंथिल वेल ने सुनवाई की। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि बोर्ड अपना पक्ष रखेगा। वहीं तीन सप्ताह में अन्य पक्षकारों को इस पर अपना जवाब देना होगा। बोर्ड के पक्षकार का कहना है कि उनका जवाब तैयार है और इसे 10 दिन में एनजीटी को दे देंगे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड को सुनवाई में शामिल किया जाना आवश्यक माना था। 12 सितंबर 2023 को आए आदेश में कोर्ट ने कहा कि बोर्ड को पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।
इससे पहले एनजीटी के आदेश पर बनी संयुक्त जांच समिति ने निरीक्षण कर देश के अन्य श्राइन बोर्ड की तर्ज पर प्रबंधन के लिए एक व्यवस्था बनाए जाने का सुझाव दिया। समिति ने धार्मिक स्थल पर बने पवित्र स्थान, कुंड, ऐतिहासिक स्थल, पर्यावरण संतुलन के लिए इसकी जरूरत बताई। चार अगस्त 2015 को एनजीटी ने समिति के सुझावों पर काम करने के लिए स्थानीय प्रशासन को आदेश किया। 2018 के आदेश में एनजीटी ने कहा कि राजस्थान सरकार ने श्राइन बोर्ड के गठन के लिए कार्यवाही नहीं की। नाथद्वारा बोर्ड द्वारा श्राइन बोर्ड के गठन के लिए एनजीटी के आदेश के संशोधन की अपील को भी खारिज कर दिया गया। अब नाथद्वारा बोर्ड द्वारा दाखिल याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने निस्तारित कर वापस एनजीटी को सुनवाई का मौका देने के लिए कहा है।
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इन्होंने दायर की याचिका
गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान की तरफ से याचिकाकर्ता बाबा आनंद गोपाल दास व अन्य ने गिरिराज पर्वत के संरक्षण के लिए 2013 में एनजीटी में याचिका दायर की गई थी। उनका कहना है कि जिला प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में यहां पूरी तरह विफल रहा है।