- मन शांत, तन मजबूत, तभी जीवन बने खुशियों का सूत्र
विश्व स्वास्थ्य दिवस
-शहर के डॉक्टरों ने बताया, स्वस्थ रहने के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल जरूरी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कुछ लोग अपनी फिजिकल हेल्थ पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन मेंटल हेल्थ (मानसिक सेहत) को नजरअंदाज कर देते हैं। एक खुशहाल और स्वस्थ जीवन के लिए मानसिक रूप से मजबूत होना भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक रूप से फिट रहना। इसके लिए क्वालिटी ऑफ लाइफ जीने पर ध्यान देना चाहिए। क्वालिटी ऑफ लाइफ के लिए फिजिकल हेल्थ और मेंटल हेल्थ का ठीक होना बहुत जरूरी है। क्वालिटी ऑफ लाइफ का मतलब अपनी नौकरी से खुश होना, फाइनेंशियल सिक्योरिटी, आर्थिक रूप से मजबूत होना, अपना घर, दूसरे के साथ व्यवहार और फिजिकल हेल्थ शामिल होती है।
हॉर्मोन को प्रभावित करता है ज्यादा तनाव : क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. जया सुकुल ने बताया कि मानसिक और फिजिकल हेल्थ दोनों मिलकर एक अच्छी सेहत को बनाती हैं। अगर हम बहुत ज्यादा मानसिक तनाव, डिप्रेशन, घबराहट में रहते हैं तो ये हमारे इम्यून सिस्टम को प्रभावित करते हैं। शरीर में काॅर्टिसोल नाम का एक हार्मोन होता है जिसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहा जाता है। अगर ज्यादा दिन या ज्यादा देर तक मानसिक तनाव में रहते हैं तो शरीर में काॅर्टिसोल का स्तर बढ़ता जाता है जिसकी वजह से इम्युनिटी कम हो जाती है।
मन ठीक नहीं है तो शरीर पर भी असर : मैक्स अस्पताल की बिहेवियरल साइंसेज कंसल्टेंट डॉ. श्रुति शर्मा कहती हैं कि अगर मन ठीक नहीं है तो शरीर पर भी असर पड़ता है, जैसे थकान, ब्लड प्रेशर या दिल की समस्या। इसी तरह शरीर की बीमारी से तनाव और चिंता बढ़ सकती है। दोनों का संतुलन ही अच्छी और खुशहाल जिंदगी देता है। मानसिक रूप से मजबूत रहने के लिए रोज व्यायाम करना, 7-8 घंटे की नींद लेना और संतुलित आहार जरूरी है। योग और ध्यान करने से मन शांत रहता है।
रोजाना खुद के लिए थोड़ा समय निकालें : मेदांता हॉस्पिटल के मेंटल हेल्थ एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. दुर्वा धर्मेश शाह ने बताया कि शरीर और मन एक ही सिस्टम के दो हिस्से हैं। अगर दिमाग तनाव में है, तो शरीर भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है। स्वस्थ शरीर मन को भी स्थिर रखता है। मेंटली स्ट्रॉन्ग रहने के लिए रोजाना खुद के लिए थोड़ा समय निकालें। मेडिटेशन, हल्की एक्सरसाइज और अच्छी नींद को प्राथमिकता दें। अपने विचारों पर ध्यान दें और नेगेटिविटी को धीरे-धीरे कम करें। अपने करीबी लोगों से जुड़े रहें और दिन में कुछ ऐसा करें जो आपको सुकून और खुशी दे।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं न लें : यथार्थ हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. प्रखर गर्ग ने बताया कि स्वास्थ्य से जुड़े फैसलों में भावनाओं या अधूरी जानकारी के बजाय विज्ञान और प्रमाणित चिकित्सा पर भरोसा करें। इंटरनेट या सोशल मीडिया पर मिली अधूरी जानकारी के आधार पर खुद दवा शुरू करना और इलाज को बीच में छोड़ना कई बार घातक होता है। ओपीडी में आने वाले लगभग 30 से 40% मरीज पहले से ही गूगल या व्हाट्सऐप से प्रभावित धारणाओं के साथ आते हैं।