माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने औद्योगिक नगरी में प्रदूषण फैलाने पर दो कंपनियों पर बड़ी कार्रवाई की है। चुलकाना गांव स्थित हरियाणा आर्गेनिक कंपनी पर 27 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें एक-एक लाख संबंधित पांच किसानों को हर्जाने के रूप में दिए जाएंगे। बाकी 22 लाख रुपये की लागत से पौधे लगाए जाएंगे। वहीं सुताना गांव स्थित नेक्शा केमिकल को ओरेंज जोन से रेड जोन में शामिल किया गया है।
एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को फैक्टरी का हर छह महीने में निरीक्षण कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र चहल ने बताया कि इससे संबंधित कोई आदेश उनको नहीं मिले हैं। ऐसे कोई आदेश हैं तो उनका पालन कराया जाएगा। वहीं एनजीटी ने 20 फैक्टरियों को प्रदूषण फैलाने के मामले में क्लीन चिट दे दी है।
एनजीटी में जारी है सुनवाई
चुलकाना गांव स्थित हरियाणा आर्गेनिक कंपनी के खिलाफ स्थानीय किसान एनजीटी में गए थे। एनजीटी के चेयरमैन के सामने मामले की लगातार सुनवाई चल रही थी। एनजीटी के सामने बुधवार को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्थानीय अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट पेश की जिसमें एनजीटी ने कंपनी पर लगाए 27 लाख रुपये के जुर्माने की रिपोर्ट पेश की। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित पांचों किसानों के बैंक खाते में एक-एक लाख रुपये जमा कराए गए हैं। बाकी 22 लाख रुपये में पौधे लगाए जाएंगे। ग्राम पंचायत चुलकाना से इसके लिए जमीन की मांग की गई थी। गांव में जमीन न होने पर अब शहर मालपुर गांव में 12 एकड़ में पौधे लगाए जाने हैं। इसके लिए वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया है। वन विभाग दो से तीन हजार पौधे लगाएगा।
रेड जोन की छह महीने में देनी होगी रिपोर्ट
सुताना ग्राम पंचायत के सरपंच ने एनजीटी में केस दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाए थे कि गांव के आसपास फैक्टरी लगाई हैं। उन्होंने 21 फैक्टरियों के नाम देकर प्रदूषण फैलाने के आरोप लगाए थे। एनजीटी ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इसकी जांच के आदेश दिए थे। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बुधवार को सुनवाई में अपनी रिपोर्ट पेश की। एनजीटी को 20 फैक्टरियों की रिपोर्ट सामान्य मिली। नेक्शा केमिकल को रेड जोन में शामिल करने के आदेश दिए। यह पहले ओरेंज जोन में थी। एनजीटी के चेयरमैन ने नेक्शा कंपनी की हर छह महीने में जांच करने और इसकी रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।