एडीसीपी सुमित शुक्ला ने बताया कि मूल रूप से मऊ के रहने वाले संजय सिंह (59) नोएडा सेक्टर-75 की एपेक्स एथेना सोसाइटी में तीसरी मंजिल पर परिवार के साथ रहते थे। वह गाजियाबाद में तैनात थे। सोमवार सुबह उन्हें दफ्तर जाना था। घर पर पत्नी अपर्णा थीं। दोनों बेटे बाहर थे। करीब 11 बजे कथित तौर पर बालकनी से कूद गए। अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच कर रही है।
काम को लेकर दबाव में थे
संजय सिंह की पत्नी अपर्णा ने कहा कि इसके पीछे विभाग का काम को लेकर दिया जा रहा मानसिक दबाव है। उनके पति मजबूत थे। यह सामान्य घटना नहीं है। विभाग के लोग इसे अच्छे तरीके से समझ सकते हैं। अपर्णा ने कहा कि सोमवार सुबह भी घर में सबकुछ ठीक था। अब पूरा परिवार अकेला हो गया है। इसके लिए कोई और लोग जिम्मेदार हैं।
अतिरिक्त चार्ज से परेशान थे डिप्टी कमिश्नर
जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर संजय सिंह की आत्महत्या मामले में परिजनों ने पुलिस के कैंसर की वजह से जाने देने के दावे को खारिज कर दिया है। पत्नी अपर्णा ने विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वहीं चचेरे भाई धनंजय सिंह ने दावा किया कि कुछ दिनों पहले संजय को विभाग में अतिरिक्त चार्ज मिला था। जिसके बाद से वह लगातार परेशान चल रहे थे। परिजनों ने कहा कि सोमवार सुबह संजय ने बॉस से सेक्टर-2 का अतिरिक्त चार्ज हटाने का निवेदन किया था। जो अनसुनी कर दी गई।
संजय सिंह की पत्नी अपर्णा ने कहा कि पति कैंसर से उबर गए थे। घटना का कारण कैंसर नहीं हो सकता है। संजय व्यवस्था के शिकार हुए हैं। उन पर विभाग का मानसिक दबाव अधिक था। वहीं भाई धनंजय सिंह ने बताया कि संजय को दस साल पहले प्रोटेस्ट कैंसर हुआ था। हाल के दिनों में अतिरिक्त चार्ज मिलने से वह परेशान थे। परिजनों ने बताया कि परिवार करीब छह साल से सोसाइटी में रह रहे थे। संजय का बड़ा बेटा गुरुग्राम में नौकरी करता है जबकि छोटा बेटा ग्रेनो के विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामले संभालते थे संजय मृतक संजय सिंह के सहकर्मी जीएसटी एडिशनल कमिश्नर एमपी सिंह ने बताया कि संजय गाजियाबाद के सेक्टर 2 में राजेंद्र नगर, ट्रांस हिंडन इलाके में जीएसटी ऑफिस में तैनात थे। वह सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामलों को संभाल रहे थे। उन्होंने बताया कि संजय को बीते पांच साल से प्रोस्टेट कैंसर था। वह बीमारी के अंतिम चरण में थे और अवसाद से जूझ रहे थे।