कार्टून की तरह बर्ताव करते हैं बच्चे
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान व मानिसक स्वास्थ्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद प्रताप सिंह ने बताया कि बच्चे आसपास हो रही चीजों से सीखने की कोशिश करते हैं। कार्टून देखकर उनको आत्मसार करने की कोशिश करते हैं। उनको लगता है अगर वह उनकी तरह बर्ताव करेंगे तो उनमें कार्टून कैरेक्टर की पावर आ जाएगी और वह कुछ अच्छा करेंगे। स्कूलों से भी इस तरह के केस रेफर होकर आ रहे हैं। महीने में तीन से चार केस ऐसे आ रहे हैं। कुछ बच्चे कार्टून कैरेक्टर से इतने जुड़ जाते हैं कि वह उनकी तरह दिखने के लिए टीशर्ट और अन्य चीजें पहनना शुरू कर देते हैं। इसलिए अभिभावकों के लिए जरूरी है कि वह बच्चों को समझाएं कि यह वर्चुअल दुनिया है।
12 महीने के बच्चे नहीं बोल रहे वाक्य
12 महीने के बच्चे पूरा वाक्य नहीं बोल पा रहे हैं। चाइल्ड परिसर में चल रहे डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) में ऐसे एक नहीं कई मामले आए हैं। बच्चों में उनकी उम्र के अनुसार भाषा का विकास नहीं हो पा रहा है। इनकी थेरेपी चल रही है। फरवरी माह में भाषा और अन्य तरह के विकास में देरी के लिए 76 से ज्यादा मामले आए हैं। हालांकि बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे हैं, जिनको भाषा के विकास के साथ-साथ अन्य दिक्कत भी हैं।
बच्चे का स्क्रीन टाइम करें कम
डीईआईसी की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट प्रिया भूषण बताती हैं कि भाषा के विकास में देरी के कई कारण हो सकते हैं। बच्चे के बोलने में देरी करने के कई कारण हो सकते हैं। कई ऐसे मामले भी आ रहे हैं, जिसमें बच्चा पूरी तरह से ठीक है, लेकिन बोलने में फिर भी देरी कर रहा है। अभिभावकों से बात करने पर पता चलता है कि बच्चे का स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा है। इस वजह से वह बातचीत कम करता है और उसकी भाषा पर पकड़ मजबूत नहीं हो पा रही।