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Noida News: श्रमिकों के बाद उठी उद्यमियों की आवाज, वृद्धि का विरोध शुरू

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श्रमिकों के बाद उठी उद्यमियों की आवाज, वृद्धि का विरोध शुरू
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- बृहस्पतिवार को उद्यमियों ने उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष से मुलाकात कर दर्ज कराया विरोध
- कहा, एमएसएमई ने कीमतें बढ़ाई तो बड़े उद्योग उत्तराखंड समेत अन्य राज्यों से खरीदेंगी उत्पाद
- एमएसएमई सेक्टर के उद्यमियों ने मांगा राहत पैकेज और सब्सिडी, नहीं तो बंद हो जाएंगे उद्योग
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। श्रमिकों की मांग पूरी होने के बाद अब जिले के उद्यमियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोला है। बृहस्पतिवार को उद्यमियों ने कलेक्ट्रेट में उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष दीपक कुमार से मुलाकात की और अपनी समस्याएं रखी। कहा कि अगर न्यूनतम वेतन वृद्धि देंगे तो फिर एमएसएमई उद्योगों पर ताला लटक जाएगा। कीमतें बढ़ाने पर बड़े उद्योग उनकी जगह उत्तराखंड व अन्य राज्यों से उत्पाद खरीदेंगे। वृद्धि का विरोध कर सरकार से राहत पैकेज देने की मांग की है। चेतावनी दी है कि अगर मांग नहीं मानी तो उद्यमी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
एक सप्ताह में राहत नहीं दी तो धरना देंगे उद्यमी:
न्यूनतम वेतन में वृद्धि के खिलाफ शहर के उद्यमी एकजुट होकर मैदान में उतरे हैं। शुक्रवार को उद्यमियों ने प्रेसवार्ता का आयोजन किया। जहां से अपनी आवाज को बुलंद कर मोर्चा खोलेंगे। उद्यमियों ने बताया कि शहर के सभी उद्यमी संगठन एक साथ एक मंच से सरकार के फैसले का विरोध करेंगे। वो श्रमिकों को बढ़ा हुआ न्यूनतम वेतन देने को तैयार है, लेकिन उद्योगों को भी राहत दी जाए। आईआईए ग्रेनो चैप्टर के अध्यक्ष सरबजीत सिंह का कहना है कि सरकार को एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। अगर किसी तरह की राहत उद्यमियों को नहीं दी गई तो फिर वो कलेक्ट्रेट पर एक दिन का सांकेतिक धरना देंगे। उसके बाद भी मांग नहीं मानी तो फिर बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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दूसरे राज्यों की तरफ रूख
करेंगे बड़े
उद्योग :

इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने बताया कि सरकार ने श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में 21 प्रतिशत की वृद्धि कर दी, लेकिन इस वृद्धि से उद्यमियों पर 26 से 30 प्रतिशत का भार पड़ेगा। खाड़ी देशों के युद्ध के कारण पहले से ही उद्योग का संचालन मुश्किल हो गया है। कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई है। अब वेतन वृद्धि की दोहरी मार पड़ी है। अगर उद्यमी बढ़ा हुआ वेतन देंगे तो उनको उत्पादन की कीमत भी बढ़ानी होंगी। ऐसा किया तो उत्पाद की भी कीमत बढ जाएंगी। ऐसे में बड़ी कंपनियां एमएसएमई उद्योगों से उत्पाद नहीं खरीदेंगी। जो और भी नुकसानदायक साबित होगा। समिति से मांग की है कि जिले के उद्योगों को विशेष सब्सिडी दी जाए।
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45 दिन में खरीदारों से भुगतान कराएं सरकार : इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने भी औद्योगिक विकास आयुक्त व समिति के अध्यक्ष दीपक कुमार से मुलाकात की और अपना मांग पत्र सौंपा। आईबीए के महासचिव सुनील दत्त ने बताया कि वर्तमान समय में एमएसएमई सेक्टर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, ऊर्जा लागत में वृद्धि, वेतन वृद्धि के अतिरिक्त दबाव व बाजार की अनिश्चितताओं के कारण गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा हैं। ऐसे में उद्योगों को राहत देने की जरूरत है। कच्चे माल की कीमतें 80 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। उद्यमी माह की 10 तारीख तक वेतन देने को भी तैयार है लेकिन भुगतान 45 दिन में कराया जाए।
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