महिलाओं में फिटनेस के लिए बढ़ रहा क्रेज
शरीर को फिट रखने के लिए जिम की ओर कर रहीं रुख
आदित्य प्रताप सिंह
नोएडा। शहर में महिलाओं के बीच फिटनेस को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। इसका असर जिम और फिटनेस सेंटरों में साफ दिखाई दे रहा है, जहां पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक देखने को मिल रही है।
महिलाएं न केवल नियमित रूप से जिम पहुंच रही हैं, बल्कि पहले की अपेक्षा अधिक समय भी फिटनेस गतिविधियों में बिता रही हैं। फिटनेस मैनेजर सोनिया अरोड़ा ने बताया कि उनके जिम में करीब 70 फीसदी सदस्य महिलाएं हैं। कई महिलाएं अपने बच्चों के साथ जिम आती हैं। कुछ परिवारों में मां और बेटी एक साथ वर्कआउट कर रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब स्वास्थ्य को लेकर पहले से अधिक सजग हो गई हैं और योग, जुम्बा, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग तथा अन्य फिटनेस गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।
लाइफ एण्ड वेलनेस कोच स्नेहा धामा के अनुसार 35 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं में हड्डियों की मजबूती कम होने और कैल्शियम की कमी जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ऐसे में मसल्स और बोन स्ट्रेंथ बढ़ाने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बेहद जरूरी हो जाती है। जागरूकता बढ़ने के साथ महिलाएं नियमित व्यायाम के अलावा खानपान पर भी ध्यान दे रही हैं। जिम ज्वाइन करने के बाद वे जंक फूड से दूरी बनाकर हेल्दी डाइट अपना रही हैं, जिससे उनकी और उनके परिवार की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।
जिम मानसिक सुकून का माध्यम
सुलेखा रावत (62) का कहना है कि जिम उनके लिए सिर्फ व्यायाम की जगह नहीं, बल्कि मानसिक सुकून का माध्यम भी है। उन्होंने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ भूलने की समस्या और मानसिक तनाव बढ़ जाता है लेकिन नियमित व्यायाम से मन और शरीर दोनों स्वस्थ रहते हैं। जिम आकर ताजगी महसूस होती है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है। महिमा बेरी के अनुसार, जिम महिलाओं के लिए एक तरह का मी-टाइम भी है, जहां वे परिवार और जिम्मेदारियों से अलग कुछ समय सिर्फ अपने लिए निकाल पाती हैं। फिटनेस विशेषज्ञों का मानना है कि शारीरिक सक्रियता महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भी बना रही है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ स्वाती त्यागी ने बताया कि महिलाएं जीवन के अलग-अलग पड़ाव पर विभिन्न प्रकार के दबाव या तनाव महसूस करती हैं। इसमें पारिवारिक दबाव, कार्यक्षेत्र का तनाव, बच्चों के एग्जाम और कॅरिअर की टेंशन हैं। इन सबके बीच अगर महिलाएं शारीरिक व्यायाम और सुबह, शाम का टहलना अपने रोजमर्रा की जिंदगी में जोड़ती हैं तो इससे शारीरिक स्वास्थ्य के साथ उनका मानसिक स्वास्थ्य भी मजबूत होता है।