मूलरूप से उत्तराखंड के चंपावत जिले के वनतौली गांव के रहने वाले महेश सिंह अल्फा कॉमर्शियल बेल्ट स्थित एक रेस्टोरेंट में काम करता था। उसमें कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखने के बाद जिम्स में 20 अप्रैल को भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने खून व प्लाज्मा की व्यवस्था करने की बात कही थी।
अगले दिन डॉक्टरों ने उसकी हालत में सुधार बताकर उपचार जारी रखा था। 22 अप्रैल को डॉक्टरों ने कहा कि उसे आइसोलेशन वार्ड से निकाल कर तीसरी मंजिल पर बने वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। इसके बाद 24 व 25 अप्रैल को जब उसके बारे में जानने का प्रयास किया गया तो कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
इसके बाद डॉक्टरों ने कहा कि मरीज की फाइल नहीं मिल रही है, इस वजह वह कहां भर्ती है ये बताना मुश्किल हो रहा है, हम तलाश कर आपको सूचित करेंगे। 28 अप्रैल को रेस्टोरेंट संचालक अमित व उसके अन्य साथी मरीज महेश को तलाशने पहुंचे तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने 24 अप्रैल को ही उसे डिस्चार्ज करने की बात कह कर उन्हें गुमराह करने का प्रयास किया।
आरोप है कि डॉक्टर मरीज के डिस्चार्ज का पूरा पेपर भी नहीं दिखा रहे। इस मामले को लेकर वहां काफी देर तक हंगामा भी हुआ। इसके बाद संस्थान के निदेशक ब्रिगेडियर डॉक्टर राकेश गुप्ता ने मामले में जानकारी कर सूचित करने का आश्वासन दिया। अभी तक मरीज के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। उधर मरीज के परिजन भी रेस्टोरेंट संचालक को उसे तलाशने के लिए दबाव बना रहे हैं। उन्होंने एफआईआर कराने की भी धमकी दी है।
भर्ती मरीज की स्थिति में सुधार हो रहा था। उसे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था। जहां से अचानक वह कहीं गायब हो गया। मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई है।- ब्रिगेडियर डॉक्टर राकेश गुप्ता निदेशक जिम्स।