आईटी कंपनियों को भूखंड पर दोगुना एफएआर देगा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण
- दो की जगह चार गुना तक एफएआर दिए जाने की तैयारी, कंपनियां बना सकेंगीं बहुमंजिला भवन, मिलेगी अतिरिक्त वर्क स्पेस
- महंगी जमीनों से राहत देने के लिए प्राधिकरण दे रहा राहत
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। आईटी और आईटी आधारित कंपनियों को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अतिरिक्त एफएआर व्यावसायिक भूखंड पर देगा। इसके लिए प्राधिकरण बोर्ड से मंजूरी के बाद अब इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। आमजन और आईटी कंपनियों से इसके लिए आपत्ति व सुझाव मांगे गए हैं जिससे बिल्डिंग बाइलॉज में आवश्यक बदलाव को मंजूरी मिल सके।
28 जुलाई को रही प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में आईटी कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त एफएआर उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें बोर्ड के पदाधिकारियों को बताया गया कि महंगी दरों के चलते कंपनियों का भूखंड में निवेश अधिक हो जाता है। ऐसे में कंपनियां निवेश करने से हिचक रही हैं। बोर्ड के सामने प्रस्ताव रखा गया कि अगर आईटी व आईटी आधारित कंपनियों के लिए आवंटित होने वाले भूखंडों पर अतिरिक्त एफएआर दिया जाए। इससे निर्माण क्षेत्रफल कंपनियां अधिक उपयोग कर पाएंगीं। इससे कंपनियों के विस्तार आदि के लिए अतिरिक्त निवेश उन्हें नहीं करना होगा। इस प्रस्ताव को बोर्ड ने मंजूरी दे दी।
प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि अतिरिक्त एफएआर दिए जाने के लिए ग्रेटर नोएडा बिल्डिंग बाइलॉज 2010 में संशोधन जरूरी होगा। इसके लिए आपत्ति-सुझाव की प्रक्रिया भी अनिवार्य है। यह प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए 15 दिन का समय दिया गया था। अगले महीने प्रस्तावित बोर्ड बैठक में इस प्रक्रिया को पूरा करते हुए अनुमोदन के लिए दोबारा प्रस्ताव रख दिया जाएगा। अगर यह प्रस्ताव अनुमोदित होता है तो दो की जगह चार गुना तक एफएआर इन भूखंड पर लागू होगा। प्राधिकरण का प्रस्ताव है कि दो की जगह तीन एफएआर बिना किसी शुल्क के दिया जाए। वहीं, एक एफएआर के लिए आवश्यक शुल्क जमाकर अनुमति दी जा सकेगी। इसके लिए जरूरी मानचित्र भी निर्माण से पहले स्वीकृत कराना होगा।
100 करोड़ रुपये से अधिक के भूखंड
सेक्टर टेकजोन और नोलेज पार्क-5 में अभी प्राधिकरण ने आईटी कंपनियों के लिए भूखंड निकाले हैं। इसमें से अधिकांश भूखंड की कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक है। किसी भी आईटी कंपनी के लिए केवल जमीन में इतना बड़ा निवेश मुश्किल होता है। ऐसे में इन कंपनियों को राहत देने के लिए अतिरिक्त एफएआर दिए जाने पर प्राधिकरण ने विचार शुरू किया।