-कच्चे माल से लेकर घटते उत्पादन से चिंतित उद्यमियों ने सरकार की मांग
-अमर उजाला उद्यमी संवाद के दौरान उद्योग संगठनों ने रखी समस्याएं
माई सिटी रिपोर्टर
नोेएडा। वैश्विक युद्ध का असर अब शहर के उद्योगों पर दिखने लगा है। लगातार बढ़ने लागत की वजह से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। ईरान- इस्राइल व अमेरिका के बीच जारी युद्ध टैरिफ की मार से भी ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। शहर के प्रमुख संगठनों ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर महंगाई को काबू पानी और निगरानी बढ़कार छोटे उद्यमियों को राहत पहुंचाने की मांग की है।
सेक्टर 52 स्थित फोनरवा कार्यालय में शनिवार को आयोजित अमर उजाला संवाद में जुटे शहर के उद्यमियों और उद्यमी संगठनों के प्रतिनिधियों ने वैश्विक उथल-पुथल को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। पेंट कारोबारी शिखा मिश्रा ने बताया कि इन दिनों श्रमिक वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर कच्चा माल भी महंगा हो गया है। ऐसे में उद्यमियों के लिए यह चुनौती आसान नहीं है। वहीं उद्यमी शक्ति सिंह ने कहा कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी स्टॉक नहीं मिल रहा है। जो मिल रहा है वह महंगा है। एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन से सुबोध और आर्यन पुरी ने कहा कि जिस तरह युद्ध का समय बढ़ता जा रहा है उसी तरह अलग अलग तरह की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। इनमें से खासकर डीजल के दाम बढ़ने, गैस की उपलब्धता कम होने और बढ़ती महंगाई परेशानी की वजह बन रही है।
एनईए के राजन खुराना और अजय अग्रवाल ने बताया कि यह समस्या बेहद गंभीर है। सरकार को इसकी निगरानी करने की जरूरत है। बड़े उद्योगपति स्टॉक रोक रहे हैं, जिसका सीधा असर छोटे उद्योग पर पड़ने लगा है। मुकेश गुप्ता ने बताया कि युद्ध के चलते कच्चे माल से बनने वाले तमाम उत्पाद, जिसमें पॉलिमर, स्टील, कॉपर समेत अन्य धातु, मशीनरी, मोबाइल समेत अन्य उत्पादों पर सीधा असर पड़ा है। इसका हल निकालने के लिए सरकार को आगे आना होगा। इस मौके लघु उद्योग भारती के उपाध्यक्ष ओमपाल सिंह, राहुल, राजन खुराना, अमरीश त्यागी, अमित अग्रवाल, आकांक्षा चुघ समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
केंद्र सरकार करे निगरानी तो मिल सकती है बड़ी राहत
एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के दिलीप मिश्रा ने कहा कि यदि बड़े उद्योगपति स्टॉक की निर्बाध आपूर्ति करें तो बढ़ी महंगाई दर काबू में आ सकती है। इसके लिए केंद्र सरकार को आगे आना होगा। सरकार को इस पर कड़ी निगरानी करनी होगी।
बढ़ा युद्ध तो करनी पड़ सकती है श्रमिकों की छंटनी
उद्यमी विकास बंसल ने कहा कि यदि युद्ध और लंबा चला को इसके संभालने के लिए कम से कम छह महीने से लेकर एक साल तक भी लग सकता है। वहीं दूसरी ओर उत्पादन घटने से श्रमिकों की छंटनी करना मजबूरी बन जाएगा।
कोट
होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होने से शिपमेंट महंगी हुई हैं। इसके अलावा शिपमेंट पहुंचने में 3-4 दिन की जगह अब 10-12 दिन लगेंगे। जिससे निर्यात पर सीधा असर पड़ा है। राजीव बंसल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईआईए
अगर ईरान और इस्राइल के बीच जारी युद्ध और भी लंबे समय तक चला तो उद्योग संभालना कठिन हो जाएगा। उत्पादन घटने से श्रमिकों की छंटनी तक करनी पड़ सकती है। विपिन मल्हन, अध्यक्ष. एनईए
सरकार को महंगाई पर लगाम लगाना चाहिए। महंगाई बढ़ाने वालों पर निगरानी बढ़ाए जाने की जरूरत है। तभी उद्यमियों को कुछ राहत मिल सकेगी। -सुरेंद्र नाहटा, अध्यक्ष, एमएसएमई नोएडा एसोसिएशन
बड़ी कंपनियों ने पानी की बोतल समेत तमाम उत्पादों के स्टॉक रोक लिए हैं। मांग के अनुसार पर्याप्त माल की समय-समय पर आपूर्ति हुई तो महंगाई घट सकती है। - डॉ. पीयूष द्विवेदी, चेयरमैन, यूपी उद्योग व्यापार मंडल
बड़ी कंपनियां मनमाने दाम बढ़ा रही हैं। इस पर रोक लगानी चाहिए। सरकार इसकी निगरानी करे ताकि छोटे उद्योगों को राहत मिल सके। -अमित कुमार सिंघल, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती नोएडा इकाई
आईजीएल की ओर से पीएनजी का विकल्प तलाशने के लिए नोटिस मिला है, लेकिन इस वैश्विक स्थिति में उद्यमी क्या विकल्प तलाशे, इस पर सरकार ध्यान दे। -वीके सेठ, सचिव, एनईए
स्टील के दाम 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं, इसका सीधा असर स्टील कारोबार और उससे जुड़े उत्पादों पर पड़ा है। लागत बढ़ने से उत्पाद भी महंगे बेचना मजबूरी हो गई है। -सतनारायण गोयल, स्टील कारोबारी
पेपर आधारित उत्पाद पर भी असर पड़ने लगा है। श्रमिक अब वेतन बढ़ाने की मांग करने लगे हैं, दूसरी ओर कच्चा माल भी महंगा, इसका प्रबंधन छोटे उद्योगों के लिए बेहद कठिन है। -आकांक्षा चुघ, पेपर कारोबारी
टैरिफ घटने के बाद मुश्किल से जनवरी में ऑर्डर मिले थे। अब वैश्विक युद्ध ने चिंता बढ़ा दी है। इसके निदान के लिए सरकार को आगे आना होगा। नीतू सिंह, कपड़ा कारोबारी
प्रमुख संगठनों और जिला प्रशासन का सहयोग मिले तो अधिकतर दुविधाएं दूर हो सकती हैं। अभी तक सरकार की ओर से ऐसी कोई कवायद नहीं की गई है। - टीसी गौड़, उद्यमी
युद्ध का असर सीधा उद्योग पर पड़ा है। मार्केट में नया स्टॉक आ नहीं रहा, जो आ रहा वह खासा महंगा है। वहीं दूसरी ओर श्रमिकों की अलग डिमांड है। कुम्मू भटनागर, मसाला कारोबारी
लुप्त होती चिकनकारी को आगे बढ़ाने की जरूरत है, इसके लिए श्रमिकों को भी आगे आना होगा, उनकी कला को निखारना पड़ेगा, इसके लिए सभी को साथ देना होगा। - डॉ. निधि जैन, उद्यमी