नगीना। मुस्लिम बहुल मेवात इलाके में उर्दू भाषा के उत्थान के लिए अभियान छेड़ा गया है। अभियान में मंगलवार को सैकड़ों लोगों ने शामिल होकर ‘उर्दू बचाओ उर्दू पढ़ाओ’ के नारे लगाए। बड़कली चौक पर गणमान्य लोगों ने एक स्वर में कहा कि सभी सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल और कॉलेजों में प्राथमिकता के आधार पर उर्दू भाषा पढ़ाई जाए, जिससे उर्दू के भविष्य को अंधकारमय होने से बचाया जा सके।
उर्दू केयर अभियान के सदस्य शमीम, सलीम, नंबरदार अलीम खान ने कहा कि उर्दू की बोली दुनिया की सबसे मीठी भाषा है। इस जबान को बोलने वाले लोगों के लिए क्षेत्र में नौकरियों की भरमार है। हमारे पहली से बारहवीं तक के स्कूलों में 90 शिक्षक विभिन्न समुदायों के लगे हुए हैं, दर्जन भर ऐसे हिंदू शिक्षक हैं जिन्होंने उर्दू भाषा के उत्थान के लिए काफी कोशिशें की हैं और लोगों को इस भाषा के कल्याण के लिए जोड़ा है। नसीम, जावेद, रियाजुद्दीन आमीन खान ने बताया कि आज की तारीख में दुनिया ऐसा महसूस कराया जा रहा है जैसे अकेले मुसलमानों की भाषा उर्दू हो। सच यह है कि उर्दू जबान सभी समुदायों की जबान रही है। जितने भी सरकारी रिकॉर्ड रहे हैं वह प्राचीन काल से सन 1970 तक उर्दू में ही लिखे हुए है। उन्होंने बताया कि जवाहर नवोदय विद्यालय में सन 1993 से अब तक केवल गुजराती भाषा पढ़ाई जा रही है जबकि हरियाणा का अकेला अल्पसंख्यक जिला होने के कारण लोग लंबे वक्त से इसमें उर्दू भाषा को शामिल करने की मांग करते आ रहे हैं। इसके लिए गालिब मौजी खान फाउंडेशन व मेवात सूचना अधिकार मंच अभियान चला रहे है और कई बार मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार और डीसी को ज्ञापन दिए जा चुके हैं। मेवात क्षेत्र के कल्याण के लिए उर्दू भाषा को प्राथमिकता देना सरकार की जिम्मेदारी है क्योंकि यहां अभी भी उर्दू भाषा के 471 जेबीटी पद खाली पड़े हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से भरा जाए। लोगों ने उर्दू केयर और उर्दू सबकी भाषा, उर्दू बचाओ उर्दू पढ़ाओ अभियान को सराहा है।