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विधि-विधान से हुई गोवर्धन की पूजा

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नूंह। जिले में गोवर्धन पर्व रविवार को धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान मंदिरों और घरों में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने गोवर्धन की मूर्ति और पर्वत बनाकर परिक्रमा की और सुख समृद्धि की कामना की। दूसरी तरफ, विश्वकर्मा दिवस भी धूमधाम से मनाया गया।
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इस दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पंडित नरेश और सुंदर निवासी गांगोली ने कहा कि गोवर्धन की पूजा वास्तव में श्रीकृष्ण की पूजा करना ही है। देवराज इंद्र को अपनी शक्तियों पर अधिक अहंकार था। इसे तोडने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने एक लीला रची। उन्होंने ब्रजवासियों से देवराज इंद्र के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा। सभी गांववालों ने इंद्र की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा की तो वे कुपित हो गए। उन्होंने भारी बारिश कर पूरे गांव को नष्ट करने का प्रयास किया। पूरा गांव जलमग्न हो गया और सभी ग्वाले इधर-उधर भागने लगे तो तब प्रभु श्रीकृष्ण ने विशालकाय गोवर्धन पर्वत को अपनी एक अंगुली पर उठाकर ग्वालों की रक्षा की। अहंकार टूटने के बाद देवराज ने प्रभु से क्षमा मांगी। तभी से दीपावली के अगले दिन गोवर्धन की पूजा होती है।
उधर, नूंह नगर के कैलाश मंदिर में भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र पटेल की अध्यक्षता में विश्वकर्मा दिवस पर अन्नकूट के भंडारे का आयोजन किया गया। गोपाल पंडित, मास्टर वेद, संजय गुप्ता, एडवोकेट सुरेश गुप्ता ने बताया कि इस दौरान सृष्टि रचयिता ब्रह्मा के पुत्र देवशिल्पी विश्वकर्मा भगवान की पूजा-अर्चना की गई। मंदिरों में भगवान विश्वकर्मा को भोग लगाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद बांटा गया। घरों में भी सभी औजारों, मशीनों व वाहनों की पूजा कर तिलक लगाया गया। उन्होंने बताया कि भगवान विश्वकर्मा से ही सर्वप्रथम कला का जन्म हुआ था। उन्होंने ही सुंदर भवनों की रचना की थी। सभी मशीनें और हाथ के औजार भगवान विश्वकर्मा की ही देन हैं।
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