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Noida News: इटावा सफारी में भी पड़ा था मिर्गी का दौरा...इस बार झेल नहीं पाया बब्बर शेर

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चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू के दौरान भी दौरा पड़ा पर इलाज के बाद हो गया ठीक
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गोरखपुर। चिड़ियाघर में रविवार को दम तोड़ने वाले बब्बर शेर भरत को मिर्गी की बीमारी पहले से थी। पहली बार उसे दौरा इटावा सफारी में पड़ा था और गोरखपुर लाने के बाद मई में बर्ड फ्लू के दौरान भी एक बार दौरा पड़ा। चिकित्सकों ने इलाज किया तो वह ठीक हो गया। रविवार को भी दौरा पड़ने के दौरान उसके शरीर के कुछ जगहों पर नीले निशान पड़ गए थे।

चिड़ियाघर के चिकित्सकों के मुताबिक, बब्बर शेर भरत को मिर्गी की बीमारी पहले से थी। इटावा सफारी में रहने के दौरान भी उसे दौरे पड़े थे। तभी से इसका इलाज चल रहा था। चिकित्सकों का कहना है कि बब्बर शेर की ब्रीड में अक्सर ये समस्या देखने को मिलती है। रविवार को इसके सीने पर दौरा पड़ा। शरीर पर नीले निशान की वजह से यह आशंका जताई जा रही थी कि सर्पदंश से इसकी मौत हो सकती है लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
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सात माह में छह वन्यजीवों की मौत
चिड़ियाघर में भरत से पहले इस साल पांच जानवरों की मौत हो चुकी है। 30 मार्च को पीलीभीत से रेस्क्यू कर लाए गए बाघ केसरी की मौत सबसे पहले हुई थी। इसके बाद पांच मई को मादा भेड़िया भैरवी, सात को बाघिन शक्ति और आठ मई को तेंदुआ मोना की मौत हुई थी। 23 मई को एक पक्षी काकाटील की भी मौत हो गई थी।


बाड़े में निकालने की थी तैयारी
चिड़ियाघर में शेरों को एक-एक दिन के अंतराल के बाद बाड़े में छोड़ा जाता है। शुक्रवार को बारिश की वजह से भरत को बाड़े में नहीं छोड़ा गया। शनिवार को शेरनी गौरी को छोड़ा गया था। रविवार को भरत को बाड़े में छोड़ने की तैयारी थी लेकिन उसके पहले ही इसकी तबीयत बिगड़ गई। रविवार को दर्शकों की संख्या ज्यादा रहती है, इसी कारण इस दिन भरत को छोड़ा जाता था। बब्बर शेर को देखकर दर्शक भी रोमांचित हो जाते थे।


भरत के बिना अकेली पड़ी गौरी
बब्बर शेर भरत और शेरनी गौरी की जोड़ी इटावा से साथ आई थी। वहां से पर काफी समय से साथ थे। भरत की मौत के बाद अब गौरी अकेली पड़ गई है। रविवार को वह काफी उदास रही। भरत की दहाड़ सुन वह क्रॉल के पास आ जाती थी।


डेढ़ साल के अंदर तीन शेरों की मौत
चिड़ियाघर के तीन शेरों की मौत डेढ़ साल के अंदर हो गई है। अप्रैल 2024 में शेरनी मरियम की मौत हो गई थी। वह प्रदेश की सबसे उम्रदराज शेरनी थी। इसके बाद बर्ड फ्लू के दौरान पटौदी की भी तबीयत बिगड़ गई। उसे इलाज के लिए कानपुर चिड़ियाघर भेजा गया लेकिन वहां पर मई 2025 में उसकी मौत हो गई। अब मिर्गी का दौरा पड़ने से भरत की भी मौत हो गई है। ऐसे में अब चिड़ियाघर में एक भी बब्बर शेर नहीं बचा।


भरत-गौरी के लिए लगा था एसी
बब्बर शेर जूनागढ़ के सूखे जंगलों में पाए जाते हैं। ऐसे में इन्हें तराई का मौसम ज्यादा पसंद नहीं आता। गोरखपुर में उमस भरी गर्मी पड़ती है। ऐसे में इटावा से आने के बाद भरत-गौरी ने पांच दिनों तक खाना नहीं खाया था। इसके बाद चिड़ियाघर प्रशासन ने इनके लिए बाड़े में एसी लगवाया था। इस बार भी गर्मी से बचाव के लिए सेंट्रलाइज्ड कूलर लगाया गया था।
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जानवरों के भोजन पर भी उठ रहे सवाल
चिड़ियाघर में पिछले एक साल में छह वन्यजीवों की मौत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इन मौतों के पीछे भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी शंका जताई जा रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इतने कम समय में लगातार इतनी मौतें सामान्य नहीं हैं और यह खुराक या देखभाल में लापरवाही का संकेत हो सकता है।
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