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जीएसटी: रिफाइंड के कम दाम पर न जाएं...वजन देख लें फिर इतराएं

सार

गोरखपुर में रिफाइंड और नारियल तेल कंपनियों ने पैकेट का वजन घटाकर कीमत में मामूली कमी की है। उपभोक्ताओं को कम दाम का लाभ कम, जबकि असल में कम मात्रा मिल रही है। व्यापारियों ने इस पर आपत्ति जताई है।
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विस्तार
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जोर का झटका धीरे से: कंपनियों ने एक लीटर की जगह ला दिया 750 एमएल का पैकेट
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गोरखपुर। जीएसटी की नई दरें लागू तो हो गईं लेकिन पुराने स्टॉक पर कीमतें कम नहीं हुई हैं। ग्राहकों की उलझनों के बीच कंपनियों ने अपने उत्पाद का वजन कम करके जोर का झटका धीरे से दिया है। अब एक लीटर वाला रिफांइड 750 एमएल का कर दिया गया है और दाम में सिर्फ 15 रुपये की कमी की गई है। अगर आप रिफाइंड तेल खरीद रहे हैं तो दाम कम होने पर न इतराएं बल्कि वजन भी जांच लें तभी कपंनियों के मुनाफे वाली गणित को समझ पाएंगे।

पादरी बाजार में फुटकर विक्रेता लकी बताते हैं- रिफाइंड तेल पहले एक लीटर के पैकेट में आता था और कीमत 150 रुपये थी लेकिन अब सभी कंपनियों ने वजन कम करके 750 एमएल कर दिया है। कीमत में 15 रुपये की कमी हुई है। सामान खरीदने आए नीरज पांडेय ने बताया कि लोग इस बात से खुश है कि दाम कम हो गया है लेकिन कोई वजन नहीं देख रहा है। 250 एमएल कम कर दिया गया है इस हिसाब से 37 रुपये कीमत कम होनी चाहिए। यह खेल कंपनियों ने धीरे से कर दिया और किसी को पता भी नहीं चला।
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100 ग्राम का नारियल तेल 20 रुपये हुआ महंगा
नारियल तेल की कीमत में तेजी से उछाल आया है। 100 ग्राम नारियल तेल का डब्बा 55 रुपये में बिक रहा था। सभी कंपनियों ने इसका दाम बढ़ाकर 75 रुपये कर दिया है। फुटकर विक्रेता दिलीप कुमार ने बताया कि एक महीने से सभी कंपनियों ने नारियल तेल का दाम बढ़ा दिए हैं।

कोट
कंपनियों को सामान का वजन कम नहीं करना चाहिए। कम वजन का नया प्रोडक्ट, नया पैक बनाकर इसका नया दाम लगाना चाहिए। वजन ज्यादा कम करके दाम को वजन के हिसाब से नहीं करने पर उपभोक्ताओं को नुकसान हो रहा है।
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- गोपाल जायसवाल, महामंत्री, गोरखपुर किराना कमेटी

कोट
कंपनियां ज्यादा मुनाफे के लिए सामान का वजन कम कर दाम कम करने का जो दावा कर रही हैं, उससे उपभोक्ताओं की जेब ढीली हो रही है। उपभोक्ता वजन न देखकर कम दाम देख रहे हैं। यह सही नहीं है, इस पर लगाम लगना चाहिए।
- संजय सिंहानिया, अध्यक्ष, चेंबर ऑफ काॅमर्स
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