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Noida News: खजनी में रात में बनता है नकली पनीर...दोपहर में पहुंचता है शहर

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खजनी में दूधिए बनाने लगे मिलावटी पनीर...रात में बनाते और दोपहर में शहर पहुंचाते
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खजनी इलाके के भैंसा बाजार, महदेवा, सतुआभार, भिउरी समेत कई गांवों में घरों में बनता है पनीर
गोरखपुर शहर के अलावा आजमगढ़, संतकबीरनगर और आंबेडकरनगर तक पहुंच रहा है खजनी का पनीर
गोरखपुर। पिपराइच और सरहरी इलाके में मिलावटी पनीर की बड़ी फैक्टरियों पर कार्रवाई के बाद अब खजनी इलाके में फिर मिलावट का धंधा चरम पर पहुंच गया है। खजनी, महदेवा, भैंसा बाजार, सतुआ भार और भिउरी समेत कई गांवों में बड़े पैमाने पर मिलावटी पनीर तैयार किया जाता है। यहां के अधिकांश दूधिए अब मिलावटी पनीर बनाने लगे हैं। वे रात में पनीर बनाते हैं और दोपहर तक शहर पहुंचा देते हैं।

जानकारों की माने तो इन गांवों के अधिकांश घरों में सस्ते मिल्क पाउडर, अरारोट और कैल्शियम क्लोराइड से पनीर तैयार किया जा रहा है। सुबह होते ही यह पनीर गोरखपुर समेत आसपास के जिलों में भेज दिया जाता है। जानकारों की माने तो रोजाना करीब 25 से 30 क्विंटल मिलावटी पनीर शहर में पहुंच रहा है। यह पनीर होटल, ढाबों और मिठाई की दुकानों में धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।
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खोआ मंडी के व्यापारियों के अनुसार गोरखपुर जिले में हर दिन 120 क्विंटल के आसपास पनीर की खपत होती है। त्योहार में अचानक मांग बढ़कर 250 क्विंटल प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। खजनी इलाके में जो लोग पहले केवल दूध का कारोबार करते थे, अब वे बढ़ी डिमांड को देखते हुए पनीर बनाने लगे हैं। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे पर आवागमन शुरू होने से इनको अपना तैयार माल अगल-बगल के जिलों में भेजने में भी आसानी हो रही है। बाजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि खजनी, महदेवा, भैंसा बाजार, सतुआ भार, भिउरी समेत कई गांवों में पनीर बनाने का काम घरों में चल रहा है। रात में पनीर बनता है और सुबह उसे बाइक पर डिब्बा ल मंडी में भेज दिया जाता है। इसके अलावा बगल के जिलों अंबेडकरनगर, मऊ, आजमगढ़ और संतकबीरनगर भी जा रहा है।
कैल्शियम क्लोराइड के पाउडर की वजह से चमक रहा यह पनीर
मिलावटी पनीर बनाने के लिए दूध की जगह सस्ता मिल्क पाउडर का उपयोग होता है। इससे बने पनीर को गाढ़ा और भारी बनाने के लिए इसमें स्टार्च के तौर आलू या अरारोट के आटे का उपयोग होता है। इसके बाद इसे सख्त, भारी और चमकदार बनाने के लिए कैल्शियम क्लोराइड के पाउडर का इस्तेमाल होता है। तैयार पनीर को जिस डिब्बे में रखा जाता है, उसमें बर्फ के टुकड़े डाल दिए जाते हैं। बर्फ पिघलता है तो उसका पानी पनीर सोख लेता है, जिससे उसका वजन बढ़ता है। कैल्शियम क्लोराइड पाउडर की वजह से यह अधिक सफेद दिखता है। हालांकि, इस पाउडर की वजह से ही पनीर को तलने पर वह रबर जैसा खिंचने लगता है।
कोट-
खाद्य वस्तुओं में मिलावट का सीधा असर लिवर पर पड़ता है। दरअसल लिवर ही शरीर में आए हानिकारक रसायनों को छांटकर अलग करता है। मिलावटी खाने में बार-बार जाने वाले केमिकल से लिवर को अतिरिक्त कार्य करना पड़ता है, जिससे उसकी कार्यक्षमता घटने लगती है। अंतत: शरीर को स्वस्थ रखने के बजाय लिवर खुद ही बीमार पड़ जाता है।
डॉ. पंकज कुमार, गैस्ट्रो विशेषज्ञ
कोट-
पनीर में मिलावट रोकने के लिए इसकी बिक्री करने वालों का पंजीकरण शुरू किया गया है। इसके अलावा लाइसेंस बनाने और पनीर को ठंडा करने के लिए उसमें सीधे बर्फ डालने के बजाय डिब्बे में अलग रखने की व्यवस्था करने का निर्देश भी पनीर विक्रेताओं को दिया जा रहा है। लोगों से अपील है कि पनीर या कोई भी खाद्य वस्तु खरीदते समय उसकी गुणवत्ता का खुद भी ख्याल रखें।
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डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य
ऐसे करें असली-मिलावटी पनीर की पहचान
- असली और मिलावटी पनीर की पहचान करने के लिए पनीर का एक टुकड़ा लें और उसे मसलें। अगर पनीर टूटकर बिखरने लगे तो समझ जाएं कि वह मिलावटी है।
- असली पनीर सॉफ्ट होता है जबकि मिलावटी पनीर थोड़ा टाइट होता है।
- खाते समय जब पनीर रबड़ की तरह खींच रहा है तो समझ जाएं की ये मिलावटी है।

- असली और नकली पनीर की पहचान पानी में उबालकर भी कर सकते हैं। पहले पनीर को पानी में उबाल लें और ठंडा हो जाने पर उसमें अरहर या सोयाबीन का पाउडर डालकर देखें। अगर पनीर काला पड़ जाए तो समझ जाएं कि ये मिलावटी है।

- पनीर का टुकड़ा सामान्य पानी में डालकर हिलाएं। अगर इसमें डिटर्जेंट मिला होगा तो झाग बनने लगेगा।
- पनीर को कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें। अगर यह मुलायम है तो मिलावटी या नकली हो सकता है। असली पनीर सख्त हो जाता है।
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