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Noida News: फ्लैट में चल रहा था सट्टेबाजी का 'काला खेल', पुलिस ने दबोचे 13 खिलाड़ी

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- ओएसिस वेनेसिया सोसाइटी के फ्लैट में चल रहा था ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी का नेटवर्क
- अलग-अलग वेबसाइट के जरिये लोगों को फंसाते थे आरोपी
- 29 मोबाइल फोन, 19 सिम कार्ड, दो लैपटॉप, एक टैबलेट और 35,700 रुपये बरामद
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सूरजपुर पुलिस ने शुक्रवार को ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ के नाम पर साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने ओएसिस वेनेसिया सोसाइटी के एक फ्लैट पर दबिश दी। वहां से गिरोह के 13 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और नकदी बरामद हुई है।
गिरफ्तार आरोपियों के पास से 29 मोबाइल फोन, 19 मोबाइल सिम कार्ड, दो लैपटॉप, एक टैबलेट और 35,700 रुपये नकद मिले हैं। यह गिरोह दिल्ली-एनसीआर और ग्रेटर नोएडा में अलग-अलग स्थानों पर ठिकाने बदलकर अपना ऑनलाइन सट्टेबाजी तंत्र चला रहा था। डीसीपी सेंट्रल नोएडा प्रवीन रंजन सिंह ने बताया कि गोपनीय सूचना पर यह कार्रवाई की गई। सूरजपुर कोतवाली क्षेत्र की ओएसिस वेनेसिया सोसाइटी साइट-सी के फ्लैट नंबर बी-12ए07 में दबिश दी गई। वहां 13 लोग ऑनलाइन गतिविधियों में लिप्त पाए गए। पुलिस ने सभी को तत्काल गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में सूरजपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। एसीपी सेंट्रल नोएडा राजीव गुप्ता ने बताया कि आरोपी तीन वेबसाइटों के माध्यम से सट्टेबाजी का खेल चलाते थे। इनमें reddypanel.com, reddybook.com और a2t.art शामिल हैं। वे लोगों को रुपये लगाकर अधिक कमाई का लालच देते थे।
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ठगी का तरीका और लेनदेन : गिरोह के सदस्य लोगों को वेबसाइट पर लॉगइन कराकर हार-जीत का खेल खिलाते थे। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सरगना लल्लन उर्फ लालू और आदित्य दूर बैठकर सदस्यों को वेबसाइट की लॉगइन आईडी और पासवर्ड देते थे। गिरफ्तार आरोपी अन्य लोगों से संपर्क कर उन्हें ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी में शामिल करते थे। कोतवाली प्रभारी संजय सिंह ने बताया कि लेनदेन के लिए बड़ी संख्या में बैंक खातों का उपयोग होता था। ये खाते दूसरे लोगों से तय रकम या लालच देकर किराये पर लिए जाते थे। जीतने वालों को यूपीआई खातों से रुपये भेजे जाते थे। अन्य लेनदेन के लिए किराये के बैंक खातों का इस्तेमाल होता था।
आरोपियों की पहचान और कार्यप्रणाली : पुलिस को आशंका है कि इन खातों के जरिये ठगी की रकम इधर-उधर की जाती थी। आरोपी साइबर गतिविधियों से जुड़े आंकड़े मोबाइल फोन और लैपटॉप से मिटा देते थे। इससे जांच में साक्ष्य नहीं मिल पाते थे। इसके बाद वे अपना ठिकाना बदल लेते थे और कुछ दिन बाद नया तंत्र शुरू करते थे। गिरफ्तार आरोपियों में करन (20), दीपक (26), शशि भूषण (26), साजन (21), सुनील कुमार (22), साजन कुमार (19), सुमित कुमार (21), राजू कुमार (23), राहुल कुमार (22), नीतिश कुमार (20), मिथलेश (21) और बसंत कुमार (25) बिहार के निवासी हैं। शिवम सिंह (25) उत्तर प्रदेश के बाराबंकी का रहने वाला है। आरोपियों की उम्र 19 से 26 वर्ष के बीच है।
गिरोह में शामिल होने का लालच : पुलिस जांच में सामने आया है कि वांछित सरगना लल्लन उर्फ लालू ने करीब डेढ़ महीने पहले ओएसिस वेनेसिया सोसाइटी में फ्लैट किराये पर लिया था। उसने अपने साथियों की मदद से गिरफ्तार आरोपियों को नौकरी और कमीशन का लालच देकर गिरोह में शामिल किया था। गिरफ्तार आरोपियों को 20 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने का वादा किया गया था। उन्हें ठगी के धंधे की पूरी जानकारी थी। आरोपी पिछले डेढ़ महीने से इस ठिकाने से वारदात कर रहे थे। गिरोह के सदस्य प्रतिदिन करीब 10 हजार रुपये तक की ठगी करते थे। अब तक 100 से अधिक लोगों से लाखों रुपये की ठगी की जानकारी मिली है।
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पुलिस ने सभी 13 आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। गिरोह के वांछित सरगना लल्लन उर्फ लालू और उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है। पुलिस ने फर्जी जुआ मंच बंद करा दिए हैं। अब बैंक खातों, ऑनलाइन लेनदेन और ठगी के शिकार लोगों की पहचान की जा रही है,
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