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Noida News: सपनों के घर में न आने दें पछतावे की दरार, जांच पड़ताल के बाद ही खरीदे

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-यूपी रेरा ने घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए जारी की एडवाइजरी
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-बिल्डर के विज्ञापन व आश्वासन पर नहीं करें भरोसा, रेरा वेबसाइट पर मिलेगी जानकारी
-आशियाना चुनने से पहले सावधान, छोटी गलती कर सकती है बड़ा नुकसान -
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। घर का सपना कहीं जिंदगी की सबसे बड़ी गलती न बन जाए। चमकदार विज्ञापन, ऊंचे-ऊंचे वादे और ''ड्रीम होम'' के दावों के बीच उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) ने घर खरीदारों को बड़ा अलर्ट जारी किया है। प्राधिकरण ने साफ कहा है कि बिना जांच-पड़ताल के प्रोजेक्ट में पैसा लगाना भारी पड़ सकता है। इसलिए बिल्डर की बातों पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय पहले उसकी पूरी सच्चाई परख लें, वरना बाद में पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा। प्रोजेक्ट व बिल्डर के बारे में यूपी रेरा की वेबसाइट पर पूरी जानकारी मिलेगी। यूपी रेरा के हेल्पडेस्क नंबर 9151602229 व 9151642229 पर फोन कर भी मदद मांग सकते हैं।

यूपी रेरा में इस समय 4098 प्रोजेक्ट पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 50 प्रतिशत प्रोजेक्ट निर्माणाधीन है। जबकि हर माह प्रदेश में 20 से अधिक नए प्रोजेक्ट शुरू हो रहे हैं। जहां खरीदार फ्लैट, दुकान और प्लॉट खरीद रहे हैं, लेकिन उससे पहले यूपी रेरा ने सभी को सचेत किया है। ताकि उनके साथ धोखाधड़ी नहीं हो सके। यूपी रेरा ने एडवाइजी जारी कर खरीदारों को सचेत किया है। कहा है कि घर खरीदने से पहले प्रोजेक्ट और बिल्डर के बारे में पूरी जांच-पड़ताल कर लें। यूपी रेरा की वेबसाइट पर पूरी जानकारी उपलब्ध है। साथ ही हेल्पडेस्क की भी मदद ले सकते हैं। पोर्टल पर प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी लेने की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया है। ताकि खरीदारों का आसानी हो सके।
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संपत्ति खरीदने से पहले यें जांच करनी जरूरी
भूमि का स्वामित्व और टाइटल:
प्रोजेक्ट जिस जमीन पर बना है, उसका स्वामित्व स्पष्ट और कानूनी रूप से वैध हैं। जमीन पर कोई विवाद या बकाया या कानूनी दावा नहीं होना चाहिए। पोर्टल पर वैधता की पुष्टि होगी।
स्वीकृत नक्शा और ले-आउट प्लान :
प्रोजेक्ट का स्वीकृत नक्शा और ले-आाउट संबंधित प्राधिकरण से अनुमोदित होना चाहिए। जो निर्माण दिखाया है, वो स्वीकृत नक्शा के आधार पर होना चाहिए।
इंवेंट्री विवरण का मिलान :
जिस फ्लैट, दुकान या प्लॉट को खरीदना है, उसकी जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है। वहां से मिलान कर सकते है। इससे धोखाधड़ी की संभावना कम होती है।
प्रोजेक्ट का बैंक खाता व कलेक्शन अकाउंट :
बिल्डर को खरीदारों से मिलने वाली धनराशि का 70 प्रतिशत हिस्सा प्रोजेक्ट के कलेक्शन अकाउंट में जमा करना होता है। खरीदारों को यह जांच करनी होगी। ताकि उनका पैसा प्रोजेक्ट को बनाने में लग सके।
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तिमाही प्रगति रिपोर्ट :
बिल्डर को प्रोजेक्ट की हर तीन माह में प्रगति रिपोर्ट देनी जरूरी है। जो यूपी रेरा के पोर्टल पर है। खरीदार रिपोर्ट को देखकर निर्णय ले सकते है।
बिल्डर के खिलाफ दर्ज शिकायतों की संख्या : यूपी रेरा पोर्टल पर जाकर बिल्डर के खिलाफ दर्ज शिकायतों की जानकारी ले सकते है। इससे उनको आसानी होगी।

खरीदारों को केवल विज्ञापन व मौखिक आश्वासन पर भरोसा नहीं करना चाहिए। यूपी रेरा की वेबसाइट पर जाकर जानकारी जुट सकते है। फ्लैट खरीदने के दौरान सावधानी बरतनी होगी। ताकि कोई उनको धोखाधड़ी का शिकार नहीं बना सके। -संजय भूसरेड्डी, चेयरमैन यूपी रेरा
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