सेक्टर-18 में ताले में जकड़ी साइकिलें, एजेंसी की तरफ़ से लगवायी गई प्रचार होर्डिंग
- अब तक एजेंसी को मुनाफे की सवारी करवाता रहा प्राधिकरण
-एजेंसी से ई-साइकिल का संचालन नहीं करवा पाए जिम्मेदार, दूसरा एमओयू कर विज्ञापन का दायरा बढ़ाया, लगवाए होर्डिंग्स
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा के 47वें स्थापना दिवस 17 अप्रेल 2023 को शहर के लिए शुरू हुई ई-साइकिल परियोजना घपले में पंक्चर हो गई। तीन साल बाद संचालन को चुनी गई एजेंसी पर नोएडा प्राधिकरण ने कार्रवाई की है। एजेंसी के साथ हुआ करार समाप्त कर दिया गया है। एक साल के लिए एजेंसी को प्रतिबंधित कर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
प्राधिकरण का ट्रैफिक सेल संचालन के लिए चुनी गई एजेंसी से साइकिलें नहीं चलवा पाया था। इसके विपरीत एजेंसी को विज्ञापन लगाने के लिए मानक तक बदलने के आरोप लगे थे। अब तक प्राधिकरण स्तर पर शिकायतें, सूचनाओं और जांच को दबाकर एजेंसी को जिम्मेदार अधिकारी मुनाफे की सवारी करवाते रहे। आखिर में जब जांच दबाया जाना मुमकिन नहीं लगा तब यह कार्रवाई की गई।
प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक आरके शर्मा ने पत्र जारी कर एजेंसी टर्बन मोबिलिटी के खिलाफ कार्रवाई की है। पत्र में बताया गया है कि एजेंसी के साथ दो एमओयू 31-31 स्थान के लिए किए गए। निर्धारित समयावधि के बाद भी एजेंसी इन जगहों पर ई-साइकिल का संचालन नहीं कर पाई। यह भी बताया गया है कि समय-समय पर किए गए निरीक्षण में अधिकांश स्टेशन पर 3 से 5 साइकिलें ही मिलीं। एमओयू के मुताबिक 10 साइकिलें होनी चाहिए थीं। 24 मई 2023 से 12 नवंबर 2024 तक एजेंसी को जारी किए 10 पत्रों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें 2024 में जारी 6 पत्रों का जवाब संतोष जनक न दिए जाने की बात कही गई है।
9 महीने बाद फिर उसी एजेंसी पर की
मेहरबानी:
नोएडा प्राधिकरण की ई-साइकिल परियोजना 2022 की है। प्राधिकरण ने 62 साइकिल स्टैंड 2 करोड़ रुपये की लागत से बनवाए थे। परियोजना का मॉडल यह था कि इन स्टैंड पर ई-साइकिल जो एजेंसी लाकर चलाएगी वह निर्धारित किराया लेगी। फिर भी एजेंसी को आर्थिक नुकसान न हो इसके लिए प्राधिकरण ने प्रचार से कमाई का अधिकार भी दिया था आरएफपी के हिसाब से पहला एग्रीमेंट 30 सितंबर 2022 को नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन ट्रैफिक सेल के डीजीएम व मौजूदा जीएम एस पी सिंह और एजेंसी टर्बन मोबिलिटी के बीच हुआ। फिर 9 महीने बाद दूसरा एमओयू 10 जुलाई 2023 को एजेंसी के साथ हुआ। इस दौरान तक भी साइकिलों का संचालन शुरू नहीं हुआ था। आरोप है कि दूसरे एमओयू में विज्ञापन अधिकार की जगह के मानक बदल कर दो गुने कर दिए गए।
एसीईओ के स्तर पर 6 महीने तक फंसी रही जांच: परियोजना में साइकिल संचालन न होने और मानक बदलने के आरोप सितंबर 2025 में सामने आए थे। इसके बाद तत्कालीन सीईओ ने एसीईओ सतीश पाल की अगुवाई में जांच समिति बनाई थी। समिति में ओएसडी महेंद्र प्रसाद, जीएम आर पी सिंह भी शामिल थे। समिति ने जांच शुरू करने का दावा किया। लेकिन अब तक जांच में क्या रहा ये स्पष्ट नहीं हो पाया।
ई-साइकिल एजेंसी के साथ प्राधिकरण के हुए दोनों एमओयू समाप्त कर दिए गए हैं। जांच में जीएम से जवाब मांगा गया था, जीएम ने एजेंसी पर कार्रवाई की सिफारिश की थी। इस क्रम में यह कार्रवाई की गई है।
- सतीश पाल, एसीईओ, नोएडा प्राधिकरण।