- बरौला मार्केट के व्यापारी पलायन को मजबूर, ग्राहक घटने से दुकान का किराया निकालना हुआ मुश्किल
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पुराने बाजारों में से एक बरौला मार्केट के व्यापारी अब पलायन को मजबूर हैं। सात साल भंगेल एलिवेटेड के साथ विकास की आस में इंतजार करते करते व्यापारियों की कमर टूट गई, एलिवेटेड तो चालू हो गया, लेकिन व्यापार जवाब दे गया। यही कारण है कि अब दुकान और स्टाफ का खर्चा निकालना तक मुश्किल हो गया है।
साल करीब 2020 में भंगेल एलिवेटेड रोड बनना शुरू हुआ था। इसके पहले भंगेल-सलारपुर और बरौला जैसी शहर की सबसे पुरानी मार्केट के व्यापारियों का व्यापार बेहतर चल रहा था। उसी दौरान कोरोना काल आया। इस बीच भंगेल एलिवेटेड का काम शुरू होने से पहले ही रूक गया। कोविड खत्म हुआ तो काम शुरू हुआ, तब मार्केट की पूरी रोड पर सिर्फ धूल धक्कड़ और गंदगी का अंबार बना रहा। कई जगह लंबे समय तक के लिए आवागमन को निर्माण कार्य के चलते रोक दिया।
व्यापारियों को लगा कि करीब दो तीन सालों में एलिवेटेड बन जाएगा। लेकिन प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही के चलते मामला और लंबा खिंच गया। व्यापारियों के इंतजार करने की सीमा भी समाप्त हो गई। आलम यह रहा कि इंतजार करते करते करीब सात साल बीत गए, तब जाकर एलिवेटेड रोड किसी तरह शुरू हो गया। फिर भी भंगेल एलिवेटेड रोड के नीचे की बरौला मार्केट में असुविधाएं घटने के बजाय और भी बढ़ गईं। जैसे पुरानी सीवर लाइन जगह -जगह जाम हो गई। सार्वजनिक शौचालय नहीं बनें, न ही रोड समय पर बनी। स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि इसी बीच कई व्यापारियों ने आर्थिक मंदी के चलते पलायन कर लिया। वहीं जो किसी तरह अपनी दुकान चला रहे हैं, वह भारी कर्जे में हैं।
लोग अपने दुकान का खर्च नहीं निकाल पा रहे हैं, सात साल बाद भंगेल एलिवेटेड रोड बनकर तैयार हुआ, फिर भी मार्केट में असुविधाएं दूर नहीं हुईं।
-संदीप गुप्ता
सालों पुराना इंफ्रा है, जो अब जवाब देने लगा है, असुविधाओं के बीच ग्राहकों ने भी आना बंद कर दिया है, इसके चलते व्यापारी पलायन कर रहे हैं।
-राम भजन सिंह
कोरोना काल खत्म हो गया, लेकिन हमारे कोरोना काल जैसे हालात हो गए हैं, ग्राहक कम हो चुके हैं, क्योंकि यहां शौचालय से लेकर पार्किंग सुविधा नहीं है।
-योगेश कुमार गुप्ता
हर पिलर पर ऐसा लगता है कि मानों कूड़ा दान बना दिया हो, नियमित सफाई तक नहीं होती है, यही कारण है कि इनसे उठने वाली दुर्गंध से ग्राहक नहीं आते हैं।
राहुल चौधरी