गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में पहली बार 2027 में जूलॉजी की अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का प्रतिनिधित्व करने जा रहा है। भारत ने यूएस को हराकर मेजबानी अपने नाम किया है। इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में 35 देशों के जूलॉजी विषय के विशेषज्ञ शामिल होंगे। देश में जूलॉजी के समसमायिक मुद्दों को उठाया जाएगा। इसके साथ ही कई ज्वलन्त विषयों पर भी चर्चा होगी। अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में कुमाऊं विश्वविद्यालय भी सहयोगी की भूमिका में रहेगा। कार्यक्रम का आयोजन गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में ही किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विश्वास त्रिपाठी ने बताया, 2027 में होने वाली कॉन्फ्रेंस की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। भारत ने बीड जीती है। जूलॉजी के व्यावहारिक पहलुओं पर विशेषज्ञ बात रखेंगे। जूलॉजी (प्राणी विज्ञान) के ज्ञान को वास्तविक दुनिया में कैसे लागू किया जा सकता है। उसके ऊपर भी कई देशों से आने वाले विशेषज्ञ बताएंगे। उन्होंने बताया कि जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाले रोगों के समाधान पर भी चर्चा होगी। इसके साथ ही जूलॉजी पारिस्थितिकी तंत्र और जीवों के बीच संबंध को समझने में मदद करती है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। कई देशों के विशेषज्ञों के रहने व अन्य व्यवस्थाएं जीबीयू में ही की जाएगी। इसके लिए सभी शिक्षकों की डयूटी लगाई जाएगी।
वैश्विक पटल पर स्थापित हो रहा जीबीयू
जीबीयू वैश्विक पटल पर तेजी से पहचान बना रहा है। नवनियुक्त कुलपति प्रो.राणा प्रताप सिंह रिसर्च को बढ़ावा दे रहे हैं। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में वियतनाम, श्रीलंका, लॉउस, थाईलैंड, वर्मा के साथ दक्षिण एशिया के कई देशों के 300 से अधिक छात्र बुद्ध स्टडीज में पढ़ाई कर रहे हैं। इसके साथ ही पीएचडी भी कर रहे हैं।
ये स्कूल हो रहे संचालित
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, स्कूल ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ इनफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग, स्कूल का ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंस, स्कूल ऑफ वोकेशनल स्टडीज एंड अप्लाइड साइंस, स्कूल ऑफ लॉ जस्टिस एंड गवर्नेस और स्कूल आफ बुद्धिस्ट स्टडीज एंड सिविलाइजेशन संचालित हो रहे हैं।