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एक बदमाश एक सिपाही सिस्टम

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हर बदमाश की 24 घंटे होगी निगरानी
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नोएडा। कमिश्नरी सिस्टम में ‘एक बदमाश एक सिपाही’ सिस्टम से अपराध पर अंकुश लगेगा। एक बदमाश के पीछे एक सिपाही को लगाकर उस पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए बदमाशों की सूची बनाई जा रही है। जैसे ही थानों में अतिरिक्त पुलिस बल आ जाएगा। यह व्यवस्था आरंभ हो जाएगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बदमाशों की गिरफ्तारी व सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए यह योजना काफी कारगर साबित होगी। कमिश्नरी सिस्टम शुरू होने के बाद भी जनपद में अपराध का ग्राफ कम नहीं हुआ है। रोजाना लूट, चोरी, स्नेचिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं। इस कारण एक बदमाश के पीछे एक सिपाही को लगाने की कवायद हो रही है। थाने स्तर पर सभी तरह के वांछित, सक्रिय, नए बदमाशों के नाम की सूची तैयार की जा रही है। कुछ दिनों में 1200 सिपाही गौतमबुद्ध नगर को मिलने हैं। अभी हर थाने को पांच से सात सिपाही मिले हैं। अगले सप्ताह तक सभी पुलिसकर्मी तैनात हो जाएंगे। इसके बाद हर सिपाही को सूची में चिह्नित किए गए बदमाशों के पीछे लगाया जाएगा। इससे बदमाशों पर 24 घंटे कड़ी निगरानी रखी जाएगी। अगले कुछ दिनों में बीट सिस्टम भी शुरू हो जाएगा। अपर पुलिस उपायुक्त रणविजय सिंह ने बताया कि क्राइम कंट्रोल करने के लिए कई तरह की तैयारियां की जा रही हैं। एक बदमाश एक सिपाही सिस्टम से क्राइम कंट्रोल किया जाएगा। इसके शुरू होने के बाद असर भी दिखाई देगा। अभी इस तरह के कई और व्यवस्था विकसित की जा रही है।
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नए गिरोह पर भी नजर
गौतमबुद्धनगर जिला दिल्ली, खोड़ा, गाजियाबाद, हरियाणा, बुलंदशहर से लगा हुआ है। यहां कई ऐसे गिरोह के बदमाश घटना को अंजाम देते हैं जो दिल्ली, खोड़ा व हरियाणा में सक्रिय हैं। ऐसे बदमाश वारदात को अंजाम देकर नोएडा से निकल जाते हैं। इस कारण असली बदमाश की पहचान पुलिस नहीं कर पाती। अभी कई ऐसे बदमाश भी नोएडा में सक्रिय हैं जो नए हैं। इनके बारे में पुलिस को भी जानकारी नहीं है। इस कारण इन पर भी नजर रखी जा रही है।
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धीरे-धीरे बढ़ रहे संसाधन
कमिश्नरी सिस्टम शुरू होने के बाद से नोएडा पुलिस को अतिरिक्त संसाधन मिलने शुरू हो गए हैं। नए पुलिस कर्मचारियों ने थानों में आमद शुरू कर दी है और इनकी ड्यूटी भी लगाई जा रही है। वहीं, थानों को नई पीआरवी भी मिल रही हैं। कई थानों को दो-दो पीआरवी दी गई हैं। इनमें 100 की जगह 112 अंकित है। पहले वाले पीआरवी में पुलिस का नंबर 100 लिखा हुआ है। हालांकि, अभी भी 100 व 112 दोनों नंबर पर पुलिस से संपर्क कर सकते हैं। धीरे-धीरे 100 नंबर को हटा दिया जाएगा।
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