संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। नई अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक में उपेंद्र मुनि ने मोहरूप वैराग्य एक आध्यात्मिक अवधारणा बताया है जिसका अर्थ है कि मोह (आसक्ति) को त्याग कर वैराग्य की स्थिति प्राप्त करना। यह उन सभी भौतिक और भावनात्मक बंधनों से मुक्ति पाने का विचार है जो हमें दुख और बंधन में डालते हैं, जैसे कि शरीर, स्त्री, पुत्र और अन्य रिश्तों के प्रति आसक्ति। मोह को ही असली बंधन माना गया है जिससे मुक्ति ही सच्चा आनंद है।
उन्होंने बताया कि मोहरूप का अर्थ है कि जो मोह से युक्त है, और वैराग्य का अर्थ है कि वैराग्य या अनासक्ति। यह भौतिक वस्तुओं, रिश्तों और शरीर के प्रति अत्यधिक लगाव को छोड़ने पर जोर देता है। मोह को ही असली बंधन माना गया है। जिससे मुक्ति ही सच्चा आनंद है। जब व्यक्ति जगत की नश्वरता और सभी संबंधों की अस्थिरता को समझता है, तो यह मोहरुप वैराग्य को बढ़ावा देता है। यह दूसरों पर प्रभुत्व जमाने या उन्हें अपने अधीन करने के बजाय, प्रेम और करुणा से दुनिया को जीतने का प्रयास करता है। इस वैराग्य को प्राप्त करने से व्यक्ति मानसिक शांति और दुख तथा भय से मुक्ति पाता है
देहरा गांव में नई जैन स्थानक का शिलान्यास आज
एसएस जैन सभा की ओर से देहरा गांव में नई जैन स्थानक का शिलान्यास रविवार को होगा। सभा के प्रधान वीरप्रकाश जैन ने बताया कि रोजाना की तरह प्रवचन सुबह 8:30 से 11 बजे तक होगा। सांस्कृतिक कार्यक्रम व भजन भी होंगे।