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शातिर गिरोह का खुलासा: एआई सॉफ्टवेयर से कमाई का झांसा देकर 500 लोगों से ठगी, फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़

Sat, 31 Aug 2024 07:52 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

कोतवाली सेक्टर-63 पुलिस ने दिल्ली निवासी एकता समेत सेक्टर-72 निवासी अमर सिंह, सर्फाबाद निवासी पुरुषोत्तम, खोड़ा निवासी प्रमोद और मोरना निवासी दीपक कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : FREEPIK
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विस्तार
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित शेयर ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर से मोटी कमाई का झांसा देकर 500 से ज्यादा लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। आरोपी दो माह से सेक्टर-63 में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर वारदात कर रहे थे। कोतवाली सेक्टर-63 पुलिस ने दिल्ली निवासी एकता समेत सेक्टर-72 निवासी अमर सिंह, सर्फाबाद निवासी पुरुषोत्तम, खोड़ा निवासी प्रमोद और मोरना निवासी दीपक कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं कॉल सेंटर के दो निदेशक रोबिन चंदेल व रूपाली अग्रवाल समेत वीआर शरण, शिवम अग्रवाल और प्रेरणा मौर्या फरार हैं। पुलिस ने मौके से 33 लैपटॉप, 23 कीपैड मोबाइल, 11 फोन समेत अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।

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तेलंगाना निवासी महिला की शिकायत की जांच में मामले का खुलासा हुआ है। नोएडा पुलिस को दी शिकायत में कामिनी वेणू ने कहा थी कि इंस्टाग्राम पर रोबोटेक प्रो आईटी एलएलपी कंपनी का विज्ञापन देखकर सेक्टर-63 स्थित कार्यालय में संपर्क किया था। कंपनी की ओर से शेयर ट्रेडिंग में निवेश करने के लिए एआई आधारित शेयर ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर देने की बात कही गई। पैकेज लेने पर निवेश के बाद लाखों की कमाई का झांसा दिया गया। आरोपियों ने कामिनी से पांच लाख की ठगी कर ली थी।

मामले की जांच के बाद पुलिस ने सेक्टर-63 के एच ब्लॉक में चल रही रोबोटेक प्रो आईटी एलएलपी कंपनी में छापा मारा। जहां फर्जी कॉल सेंटर चल रहा था। एडीसीपी हृदयेश कठेरिया ने बताया कि रोबोटेक प्रो आईटी एलएलपी कंपनी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से मान्यता प्राप्त नहीं है। जबकि इस तरह के शेयर ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर सेबी की मान्यता के बगैर नहीं बेचे जा सकते। आरोपी फर्जीवाड़ा कर लोगों से ठगी कर रहे थे।
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सोशल मीडिया पर देते थे विज्ञापन
एसीपी दीक्षा सिंह के मुताबिक जालसाज फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि पर विज्ञापन देते थे। विज्ञापन में दावा किया जाता था कि एआई सॉफ्टवेयर शेयर बाजार के फाइनेंशियल डाटा को एनालाइज कर शेयर चुनता है। चुने हुए शेयर से ट्रेडिंग करने पर लाखों के मुनाफे का दावा किया जाता था। आरोपी सॉफ्टवेयर खरीदने के लिए 14 हजार से 1.20 लाख रुपये लेते थे। इसके साथ ही हर माह 12 हजार रुपये सर्विस चार्ज और 18 प्रतिशत जीएसटी वसूलते थे। सॉफ्टवेयर खरीदने के बाद ग्राहकों को आईडी पासवर्ड दिया जाता था।

नुकसान होने के बाद अपग्रेडेड वर्जन से खरीदने के नाम पर झांसा : पुलिस पूछताछ में जालसाजों ने साफ कहा कि सॉफ्टवेयर में एआई का इस्तेमाल नहीं होता था। आमतौर पर हर ग्राहक को सॉफ्टवेयर लेने के बाद नुकसान होता था। तब जालसाज ग्राहकों को अपग्रेडेड वर्जन खरीदने के लिए कहते थे। कोडिंग से सॉफ्टवेयर के बेहतर बनाए जाने की जानकारी दी जाती थी।

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