-पिछले ढाई साल में 90 से अधिक लोगों से दो करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है।
-आठ आरोपियों के पास से लैपटॉप, मोबाइल, टेबलेट, एटीएम कार्ड, चेक, घड़ियां, कार बरामद
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ईकोटेक-1 कोतवाली पुलिस ने सोमवार को नामी विदेशी कंपनी की ज्वेलरी, घड़ियों, डिनरसेट आदि में निवेश कर जल्द अमीर बनने का सपना दिखाकर ठगी करने वाली कंपनी का खुलासा कर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी क्यूनेट/विहान नाम की फर्जी मार्केटिंग कंपनी के जरिए निवेश कराने के नाम पर लोगों को जल्द करोड़पति बनाने का सपना दिखाते थे।
आरोपियों की पहचान पश्चिमी मेदिनीपुर बंगाल के विधान डागर (27), रांची झारखंड के सतीश शाव (29), बनासकांठा गुजरात के कल्पेश राजू भाई (23), लुधियाना पंजाब के गुरविंदर सिंह (29), मुक्तसर पंजाब के गुरदीप सिंह (39), पश्चिमी मेदिनीपुर बंगाल के कौशिक डागर (31), पूर्व मेदिनीपुर बंगाल के गणेश बेरा (23) और पश्चिमी मेदिनीपुर के तापस धारा (28) के रूप में हुई है। सभी आरोपी विभिन्न राज्यों बंगाल, झारखंड, गुजरात और पंजाब से ताल्लुक रखते हैं। फिलहाल ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अलग-अलग सोसायटी में किराये पर फ्लैट लेकर रहते थे। एडिशनल डीसीपी ग्रेटर नोएडा सुधीर कुमार ने बताया कि पूछताछ में खुलासा हुआ कि सभी लोग मिलकर एक संगठित तरीके से लोगों को ऑनलाइन मीटिंग और प्रेजेंटेशन दिखाकर करोड़पति बनने का सपना दिखाते थे।
सरगना सेवानिवृत्त जवान है
पुलिस ने इनके कब्जे से 10 लैपटॉप, 13 मोबाइल फोन, पांच टैबलेट, 30 एटीएम कार्ड, एक करोड़ रुपये का चेक, चार महंगी घड़ियां और एक स्विफ्ट कार बरामद की है। गिरोह पिछले ढाई साल में 90 से अधिक लोगों से दो करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। गिरोह का सरगना दुबई में बैठकर पूरे गिरोह को संचालित करता है। गिरोह के सदस्य सेना से सेवानिवृत जवान हैं। जो ठगी का शिकार होने के बाद दूसरों को निशाना बना रहे थे।
डॉलर और बिटकॉइन में ट्रांजेक्शन
आरोपी गूगल मीट पर ऑनलाइन मीटिंग करते थे। जिसमें कंपनी के प्रोडक्ट जैसे सोना, हीरे और घड़ियों को खरीदने और बेचने का झांसा देकर निवेश कराते थे। लोगों को कंपनी में शामिल होने के लिए करीब 1.5 लाख रुपये देने पड़ते थे। यह रकम गूगल मीट के दौरान भेजे गए लिंक के जरिए डॉलर या बिटकॉइन में जमा कराई जाती थी।
छह राज्यों में दर्ज हैं मुकदमें
आरोपियों में से कई का सेना बैकग्राउंड भी है। इनमें कई आरोपी सेना से सेवानिवृत हो चुके हैं। सेना से जुड़े होने के कारण आरोपी फायदा उठाकर सेना के जवानों से भी संपर्क करते थे और उन्हें भी निवेश के लिए फंसाते थे। क्यूनेट/विहान नाम की इस कंपनी के खिलाफ दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में जांच चल रही है। इसके अलावा राजस्थान, मेघालय, मणिपुर, मध्य समेत अन्य राज्यों में भी इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं।
गुमराह करने के लिए रखी थी डायरी
आरोपी कहते थे कि नौकरी करने सो कई फायदा नहीं। उनके साथ जुड़े तो जल्द करोड़पति बना देंगे। आरोपियोंं के पास एक डायरी भी मिली है। इसमें लोगों को गुमराह करने के लिए एक जैसे शब्द एक पन्ने पर लिख जाते थे। ग्रेटर नोएडा ब्रांच का सरगना कौशिक डागर है। उसी ने 40 हजार रुपये प्रतिमाह पर किराये पर दफ्तर भी ले रखा था। आरोपी गुरदीप सिंह से सेना से सेवानिवृत है। वहीं बाकी आरोपियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले रखा है।
दुबई में बैठा ठग कंपनी का सरगना
आरोपी गूगल मीट और जूम के जरिये एक दूसरे से संपर्क करते थे। ग्राहकों को फंसाने का मुख्य सरगना सोमनाथ दुबई में बैठा है। वह सतीश शाव का रिश्तेदार है। भारत में प्रतिबंधित हांगकांग बेस्ड क्यूनेट व विहान कंपनी चेन सिस्टम के जरिए जल्दी करोड़पति बनने का झांसा देकर निवेश के नाम पर ठगी कर रहा था। बाजार से चौगुने महंगे दाम पर प्रोडक्ट खरीद कर बाजार में मनी सर्कुलेशन के नाम पर भारतीय मुद्रा को विदेशों में भेजा जा रहा था।
बंगाल के युवक को ठगने के बाद दी थी धमकी
पीड़ित के भाई प्रवीण कुमार पाल ने केस दर्ज कराया था कि उनका चचेरा भाई निखिल कुमार पाल सितंबर-2024 में गांव चूहड़पुर में किराये पर रह रहा था। वहीं उसकी मुलाकात से हुई थी। आरोप है कि इन लोगों ने निखिल को बताया कि वह एक बड़ी कंपनी की फ्रेंचाइजी दिला सकते हैं। जिसमें घड़ियां, ज्वैलरी जैसे महंगे प्रोडक्ट बेचे जाते हैं और अच्छा कमीशन भी मिलता है। जितना ज्यादा पैसा लगाएगा। उतनी ही ज्यादा कमाई होगी। निखिल ने आरोपियों के झांसे में आकर साढ़े सात लाख रुपये दे दिए। लेकिन उसे न तो कोई प्रोडक्ट मिला और न ही पैसे वापस हुए। जब पीड़ित ने पैसे वापस मांगे, तो कौशिक डांगर और उसके साथियों ने उसे जान से मारने की धमकी दे दी।