दादरी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निर्देश पर पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के साथी की बेनामी संपत्ति की जांच मेेें 37 करोड़ के काले धन के फर्जीवाड़े में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक्सिस बैंक के दो पूर्व फील्ड ऑफिसर भी शामिल हैं। वहीं, बैंक के ऑपरेशन हेड समेत तीन फरार आरोपियों की गिरफ्तारी का प्रयास जारी है। मामले की जांच कर रहे सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) मेरठ के डीएसपी सुधीर बालियान ने वर्ष 2020 में दादरी कोतवाली में आठ आरोपियों पर केस दर्ज कराया था। फर्जी नाम-पते से फर्म बनाकर दादरी में एक्सिस बैंक की शाखा समेत विभिन्न बैंक खातों से लगभग 200 करोड़ का फर्जीवाड़ा किया गया था। फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड सीए गुप्ता थे, लेकिन जांच के दौरान उनकी मौत हो चुकी है।
दादरी कोतवाली प्रभारी प्रदीप त्रिपाठी के अनुसार, क्षेत्र की एक्सिस बैंक शाखा समेत अन्य खातों में लेनदेन कर फर्जीवाड़ा किया गया था। 25 जुलाई 2020 को दादरी में नामजद रिपोर्ट कराई गई थी। दादरी में फर्जी नाम-पते से दस्तावेज तैयार कर फर्जी फर्म व बैंक खाते खोलकर 37 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया था। वॉल प्लास्ट फर्म का मालिक राजकुमार गुप्ता व महावीर ट्रेडिंग फर्म का मालिक मनोज सिंह को बताया गया था। रविवार को कोतवाली पुलिस ने जीटी रोड पर गांव बील अकबरपुर के पास से आरोपी दिल्ली के ज्वाला नगर निवासी मनीष अरोड़ा, मंडावली फाजलपुर निवासी मनोज कुमार व पल्लव जायसवाल और साहिबाबाद के शालीमार गार्डन निवासी विनय तिवारी को गिरफ्तार कर लिया। विनय व पल्लव जायसवाल बैंक के पूर्व फील्ड ऑफिसर हैं। धोखाधड़ी के लिप्त अन्य आरोपियों की पुलिस तलाश में लगी है। जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।
ईडी की जांच में खुलासे के बाद हुई विजिलेंस जांच
पुलिस के मुुताबिक, गायत्री प्रजापति के साथी दीपक कुमार सिंह की जांच ईडी ने की थी। इसमें जानकारी मिली कि दीपक ने डायनमिक रियलकॉन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक मुखौटा कंपनी बनाई है। इसके बाद 12 अक्तूबर 2017 को विजिलेंस को जांच सौंपी गई थी। जांच में पता चला कि सीए श्याम शंकर गुप्ता ने चालक मनोज सिंह के नाम पर महावीर इंडस्ट्रीज के नाम से दादरी के एक्सिस बैंक में फर्जी तरीके से खाता खोला है। इसमें 90 अन्य कंपनियों व पांच लोगों ने गैर कानूनी ढंग से लेन-देन किया है। दूसरी मुखौटा कंपनी मेसर्स वॉल प्लास्ट के नाम से भी दादरी स्थित एक्सिस बैंक में ही खाता खोला गया था। इसमें 30 अन्य कंपनियाें और 11 लोगों की बेनामी संपत्ति के काले धन का लेनदेन किया गया। दोनों कंपनियों को दिल्ली के फर्जी पते और फर्जी नामों पर रजिस्टर्ड कराया गया था।
बैंक अधिकारियों की मिलीभगत आई सामने
वॉल प्लास्ट कंपनी में लोहे का कारोबार दर्शाया गया और मामूली इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल की गई। 20 अप्रैल 2014 से 10 अप्रैल 2015 के बीच महावीर ट्रेडिंग में करीब 15 करोड़ रुपये का लेनदेन मिला। जबकि इस अंतराल में कंपनी की वार्षिक आय केवल साढ़े 4 लाख रुपये दिखाई गई। वहीं, महावीर इंडस्ट्रीज को कपड़ा व्यवसाय के लिए पंजीकृत कराया गया था। इसमें 30 अप्रैल 2014 से 20 मई 2015 के बीच करीब 45 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया। वर्ष 2014 में जब फर्जी कंपनियों के खाते खोले गए तो पता चला कि इसमें दादरी शाखा के ऑपरेशनल हेड पंकज आर्या और फील्ड ऑफिसर पल्लव जायसवाल व विनय तिवारी ने फर्जी दस्तावेज के आधार मिलीभगत कर खाते सत्यापित किए हैं। आरोपियों ने जिनके नाम पते दिए गए थे। जांच में वह फर्जी निकले। कुल 200 करोड़ के फर्जीवाड़े में 37 करोड़ रुपये का लेनदेन दादरी स्थित एक्सिस बैंक के दो खातों से किया गया है।