किसान परिवार के अपहरण की साजिश में एयर इंडिया के पायलट समेत पांच गिरफ्तार
-इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के बाद सक्रिय हुई पुलिस ने गिरोह का किया पर्दाफाश
-आरोप है कि एयरपोर्ट के आसपास जमीन पर अवैध कब्जे व प्रोजेक्ट में रुकावट की मंशा से रची साजिश
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जेवर कोतवाली पुलिस ने एक किसान परिवार के अपहरण की साजिश में एयर इंडिया के पायलट समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि आरोपियों ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट परियोजना के विस्थापन, अधिग्रहण और पुनर्वास कार्य में बाधा डालने और पुलिस-प्रशासन पर दबदबा बनाने के लिए किसान परिवार का अपहरण किया था। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। जिस पर पुलिस ने सक्रिय होकर गिरोह का खुलासा किया।
डीसीपी ग्रेटर नोएडा शाद मियां खान ने बताया कि आरोपियों में एयर इंडिया का पायलट, उसकी पत्नी और सास भी शामिल हैं। इनकी पहचान सेक्टर-135 नोएडा के पायलट पुत्तन, उसकी पत्नी सरोजबाला, दिल्ली निवासी सास रामादेवी, गांव दयानतपुर जेवर के पवन चौधरी व प्रमोद के रूप में हुई है। इनके पास से घटना में प्रयुक्त बीएमडब्ल्यू कार बरामद की गई है। उन्होंने बताया कि जेवर एयरपोर्ट के प्रथम चरण 1 में शामिल छह गांवों के निवासियों को आरआर साइट जेवर में पुनर्वासित किया गया था। हालांकि गांव रोही निवासी हंसराज, उनकी पत्नी कमलेश देवी और दो बेटे सौरभ और सोनू पुनर्वास स्थल पर जाने को लेकर असहमत थे। तीन सालों से वो एयरपोर्ट परिसर की बाउंड्री के भीतर रह रहे थे। 29 मई 2025 को उपजिलाधिकारी जेवर ने उन्हें वहां से हटाकर आरआर साइट में आवंटित भूखंड पर शिफ्ट किया था। उसी दिन सौरभ ने अपने माता-पिता को कैलाश अस्पताल जेवर में भर्ती कराया था। जिन्हें स्वस्थ होने के बाद 4 जून को अस्पताल से डिस्चार्ज करा लिया गया था।
2 जून 2025 को सोनू ने स्थानीय किसान नेता, अधिवक्ता के कहने पर हाईकोर्ट इलाहाबाद में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका दायर कर दावा किया कि उसके माता-पिता और छोटे भाई को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अवैध रूप से हिरासत में लिया हुआ है। 9 जून को अदालत ने याचिका को स्वीकार किया और पुलिस ने 11 जून को अपहृतों को अदालत में पेश करने का आदेश जारी किया था। पुलिस ने सात टीमें गठित कर तलाश शुरू की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद सुनवाई की तिथि 12 जून तय की गई। इस बार भी पुलिस अपहृत परिवार को ढूंढ नहीं पाई। इस कारण अदालत ने अगली सुनवाई 7 जुलाई को तय की। 26 जून को हंसराज के परिचित कामेश की शिकायत पर जेवर थाने में बीएनएस की धारा-140 (3) के तहत मामला दर्ज किया गया।
जांच में सामने आया है कि मास्टरमाइंड कैप्टन पुत्तन सिंह, पत्नी, सास और दो अन्य साथियों की मदद से हंसराज व उनके परिवार को 6 जून की रात इलाज के बहाने झांसा देकर अगवा किया था। उन्हें बीएमडब्ल्यू कार से पहले सेक्टर-135 नोएडा अपने घर फिर मैदानगढ़ी (दिल्ली) में स्थित अपने सास रामा देवी के मकान में छिपाकर रखा गया। वहां से 15 जून की सुबह तड़के उन्हें दयानतपुर गांव के एकांत में स्थित पवन चौधरी के फार्महाउस पर स्थानांतरित किया गया। इस दौरान अपहृतों को बंधक बनाकर रखा गया ताकि हाईकोर्ट में पुलिस व प्रशासन को दोषी ठहराया जा सके और एयरपोर्ट परियोजना में विघ्न डालकर राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक दबदबा स्थापित किया जा सके। शुक्रवार को पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर अपह्त परिवार को दयानतपुर के बाहरी इलाके से सकुशल बमामद कर लिया।
पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों को निलंबित कराने की थी योजना
पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी पायलट की ससुराल दयानतपुर में है। इस कारण उसका दयानतपुर आना-जाना लगा रहता था। यही कारण है कि उसकी पवन चौधरी व प्रमोद से अच्छी जान पहचान थी। आरोपी ने अन्य आरोपियों पूर्व में जिला प्रशासन से मुआवजा दिलाने के लिए कागजी प्रक्रिया में मदद की थी। आरोपी का उद्देश्य इस पूरे मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई कराकर गांव में दबदबा बनाना था। आरोपी इसी दबदबे के माध्यम से एयरपोर्ट के पास विकसित होने वाली सुविधाओं में अनुचित आर्थिक लाभ उठाना चाहता था।
अपहृत परिवार, याचिकाकर्ता की भूमिका की जांच
मामले में सोनू के साथ उसके परिवार की भूमिका की जांच की जा रही है। चूंकि सोनू ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इसलिए पुलिस ने मामले में अभी शामिल नहीं किया है। लेकिन जांच के बाद पुलिस की ओर से मामले में सोनू के अलावा परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस का कहना है कि साजिश में परिवार की सहमति के बगैर अपहरण संभव नही है। पुलिस को कई ठोस सबूत मिले हैं। हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई में इन सबूतों को रखा जाएगा।