फोटो05नगला नरपत में बाढ़ के पानी के बीच से होकर निकल कर जाते बच्चे। संवाद
कासगंज। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में बारिश होने से गंगा में उफान के हालात हैं। जिले में गंगा खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। उफनाती गंगा की धारा ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। लोग भोजन से लेकर पशुओं के चारे के लिए परेशान हैं। रास्तों में पानी भरा होने के कारण आवागमन में खासी दिक्कत से जूझना पड़ रहा है। ताजा स्थिति देखते हुए फिलहाल उन्हें जल्द राहत मिलने की संभावना नहीं है। गंगा के हरिद्वार बैराज से करीब 25 हजार क्यूसेक पानी का प्रवाह बढ़ गया है। वहीं, बिजनौर से करीब 30 हजार क्यूसेक पानी का प्रवाह बढ़ा है। वहीं नरौरा बैराज से भी 11 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। कछला ब्रिज पर गंगा का जलस्तर बुधवार को सुबह 8 बजे 162.60 मीटर के निशान पर था जो खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर था। जलस्तर में और वृद्धि के आसार लगातार बने हुए हैं। इससे प्रभावित इलाकों में लोगों की दिक्कत हर नए दिन के साथ बढ़ती जा रही हैं। गंगा की बाढ़ का पानी प्रभावित इलाकों में बढ़ता जा रहा है।
लहरा इलाके में भी लगातार पानी फैल रहा है। इससे ग्रामीणों की चिंतित हैं। यही हाल पटियाली इलाके के नगला नरपत, हंसी नगला, नगला दुर्जन, नगला जयकिशन, मूंजखेड़ा, नवाबगंज नगरिया, पीतमनगर हरौड़ा सहित तमाम इलाकों में आबादी के बीच पानी है। तमाम घरों में पानी भरा हुआ है। लोग पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। भोजन पकाने में भी लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। घरों में तख्त के ऊपर चूल्हा रखकर खाना बना रहे हैं। वहीं जिनके मकान पक्के हैं वे घर की छतों पर खाना बना रहे हैं। ग्रामीण दिनचर्या के कार्यों को लेकर भी परेशान हो रहे हैं। शौच के लिए भी ग्रामीणों को काफी दूर जाना पड़ता है। बच्चों और महिलाओं को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नगला नरपत के अशोक कुमार ने बताया कि गांव में पानी भरा हुआ है। एक समय से अधिक का समय हो गया है, लेकिन अभी तक बाढ़ से निजात नहीं मिल रही। दो दिन से पानी और बढ़ने लगा है। ग्रामीण तरह तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। बच्चे व महिलाएं बीमार हैं। वहीं सहावर के अजीतनगर, उलाई, रफातपुर, शहवाजपुर, बमनपुरा, चकरा, नगला ढाव, नगला चोखे सहित आसपास के तमाम गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।