संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। ग्रीन पटाखे बजाए के सरकारी आदेश पटाखों की तेज आवाज में गुम हो गए। दिवाली की शाम से अलसुबह तक खूब पटाखे चले। प्रतिबंध के बावजूद शहर सहित जिलेभर में पटाखों की जमकर बिक्री हुई और लोगों ने खूब पटाखे चलाए। पटाखों के धुएं से जिले की हवा जहरीली हो गई। इस दौरान जिले का एक्यूआई 224 दर्ज किया गया। इससे लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश, खुश्की व खुजली इत्यादि की शिकायत हुई।
दिवाली पर छोड़े पटाखे व आतिशबाजी से जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार दो दिन से सामान्य से पांच-छह गुना अधिक बना रहा। सोमवार रात करीब 12 बजे यह 196 दर्ज किया गया। वहीं, मंगलवार सुबह इसका मान बढ़ गया और शाम को चार बजे एक्यूआई 224 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। अत्याधिक प्रदूषण होने से लोगों को कई तरह की परेशानी हुई। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों व बच्चों को हुई। इसके अलावा लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश, खुजली इत्यादि की शिकायत हुई। ऐसे में चिकित्सकों ने लोगों को कुछ दिन चश्मा व मास्क लगाने की सलाह दे रहे हैं। वहीं, सांस व दमा के मरीजों के लिए यह प्रदूषण आफत बन गया और उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई।
यही नहीं यह शिकायत कुछ बच्चों में देखने को मिली। सिविल अस्पताल सहित जिले के निजी अस्पतालों में 700 से ज्यादा लोग ऐसी शिकायतें लेकर पहुंचे। चिकित्सक सौरभ गर्ग ने बताया कि मंगलवार को उनके पास करीब 40 से 50 लोग आंखों में जलन, गले में खराश, खुश्की व खुजली की शिकायत लेकर पहुंचे।
सिविल अस्पताल के सामान्य रोग चिकित्सक डॉ. सचिन शर्मा ने बताया कि मंगलवार को सांस संबंधी रोगों की शिकायतों में इजाफा हुआ है। इसमें करीब 10 प्रतिशित की वृद्धि हुई है, जो दिवाली के समय पर होती है। चिकित्सक लोकेश कुमार ने बताया कि उनके पास करीब 20 से 25 मरीज दमा की शिकायत लेकर आए। ऐसे में चिकित्सक लोगों को कुछ दिन एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं। एक्यूआई 50 तक सामान्य माना जाता है। इसके आगे 50 से 100 मध्यम, 100 से 150 संवेदनशील समूहों के लिए अस्वास्थ्यकर, 150 से 200 सभी के लिए अस्वास्थ्यकर और 200 से 300 बहुत ही अस्वास्थ्यकर माना गया है। फिजिशियन डॉ. सचिन शर्मा ने बताया कि सौ से अधिक एक्यूआई सेहत के लिए नुकसानदायक है। इसमें खासकर आंखों और श्वास की परेशानियां होती हैं। वायु प्रदूषण से अधिक समय तक रहने से बचना चाहिए। कुछ समय सैर से परहेज करें। घर से बाहर निकलते समय चश्मे का प्रयोग करें। वहीं, आंखें पानी से धोएं।
करीब 11 करोड़ रुपये के बिक गए पटाखे
जिला में छोटी व बड़ी दिवाली पर करीब 11 करोड़ रुपये के पटाखे बिके। जिले में स्थायी रूप से पटाखा बेचने के लिए 13 लोगों ने लाइसेंस ले रखा है। इसके अलावा दिवाली से पहले 150 से अधिक लोगों ने अस्थायी लाइसेंस लिया था। पटाखा गोदामों पर कई दिनों से भीड़ लगी हुई थी। यहां से एक-एक व्यक्ति ने हजारों रुपये के पटाखे खरीदे। एक पटाखा कारोबारी ने बताया कि जिन लोगों ने दिवाली पर पटाखे बेचने के लिए अस्थायी लाइसेंस लिया था उनमें से काफी ने जिले से ही पटाखे खरीदे थे। परंतु काफी लोग ऐसे होते हैं सीधे उत्तर प्रदेश की पटाखा फैक्टरियों से ही पटाखे खरीद कर लाते हैं। वहां से उन्हें पटाखे सस्ते मिल जाते हैं। पूरे जिले में करीब 11 करोड़ रुपये के पटाखे बिके। क्योंकि ग्रीन पटाखों की आड़ में तेज आवाज वाले बड़े पटाखे भी बेचे गए। इनसे प्रदूषण ज्यादा होता है।
दिवाली पर चलते पटाखे और निकलता धुआं। संवाद