- ई-रिक्शा और ई-स्कूटर की अनियंत्रित चार्जिंग बनी चिंता, पीजी और शहरी गांवों में सामान्य वायरिंग पर बढ़ रहा दबाव
मोहम्मद बिलाल
ग्रेटर नोएडा। जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन सुरक्षित चार्जिंग व्यवस्था का अभाव गंभीर खतरे का रूप लेता जा रहा है। शहरी गांवों, पीजी, किराये के मकानों और बहुमंजिला इमारतों में घरेलू बिजली के सामान्य सॉकेट ही ई-रिक्शा और ई-स्कूटर के अस्थायी चार्जिंग स्टेशन बन चुके हैं। दिनभर सड़कों पर दौड़ने वाले हजारों ई-रिक्शा और डिलीवरी एजेंसियों के इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन रात में इन्हीं घरेलू कनेक्शनों से चार्ज किए जाते हैं। एक्सटेंशन बोर्ड, मल्टी-प्लग और पुरानी वायरिंग के सहारे घंटों चलने वाली यह चार्जिंग व्यवस्था अब आग की घटनाओं का बड़ा कारण बनती जा रही है। हाल ही में नोएडा के मामूरा क्षेत्र में बेसमेंट में चार्जिंग के दौरान लगी आग में दो लोगों की मौत ने इस खतरे को एक बार फिर उजागर किया है।
अग्निशमन विभाग और विद्युत विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षित और मानक आधारित चार्जिंग व्यवस्था विकसित नहीं की गई तो भविष्य में ऐसे हादसों की संख्या बढ़ सकती है।
16 एम्पियर का सॉकेट लगा देना पर्याप्त नहीं
गौतमबुद्धनगर विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रिकल विभाग के एचओडी डॉ. ओमवीर सिंह ने बताया कि ईवी (इलेक्ट्रिक) दोपहिया वाहनों में आग लगने के पीछे आमतौर पर एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं। अधिकांश मामलों में आग लिथियम-आयन बैटरी के अत्यधिक गर्म होने से लगती है। कमजोर वायरिंग, ढीले प्लग या अधिक लोड वाले एक्सटेंशन बोर्ड से स्पार्किंग और ओवरहीटिंग आग लग सकती है। लंबे समय तक चार्जर लगे रहने या खराब चार्जर के इस्तेमाल से बैटरी गर्म होती है। इससे आग लग सकती है। कंपनी द्वारा दिए गए चार्जर की बजाय सस्ते या नकली चार्जर का उपयोग बैटरी को नुकसान पहुंचाता है। सामान्य घरेलू बिजली व्यवस्था लंबे समय तक उच्च क्षमता वाले इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए तैयार नहीं की जाती। लगातार कई घंटों तक हाई करंट गुजरने से तारों का तापमान बढ़ जाता है। यदि वायरिंग पुरानी हो, अर्थिंग सही न हो या सुरक्षा उपकरण नहीं लगे हों तो आग लगने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। केवल 16 एम्पियर का सॉकेट लगा देना पर्याप्त नहीं है। सुरक्षित चार्जिंग के लिए अलग कॉपर वायरिंग, समर्पित सर्किट, उचित क्षमता का एमसीबी, आरसीडी सुरक्षा और मानक ईवी चार्जिंग उपकरण आवश्यक हैं।
घरेलू कनेक्शन पर पीजी या किराये के कमरों में आ रही बिजली
मकान मालिकों ने अपने मकानों को पीजी या किराये के कमरों में बदल दिया है, लेकिन बिजली व्यवस्था वर्षों पुरानी ही बनी हुई है। घरेलू कनेक्शन पर पीजी और किराये के कमराों में बिजली की आपूर्ति की जाती है। इन पीजी और किराये के कमराों में जहां पहले एक परिवार रहता था। वहां अब 15 से 20 लोग रहते हैं। इनके साथ कई इलेक्ट्रिक वाहन भी चार्ज होते हैं। अधिकांश स्थानों पर न तो विद्युत भार बढ़ाया गया है और न ही अलग चार्जिंग लाइन बनाई गई है। ऐसे में पूरी व्यवस्था घरेलू वायरिंग के भरोसे चल रही है। चार्जिंग के दौरान चार्जर काफी गर्म हो जाता है। यदि उसके आसपास पर्याप्त वेंटिलेशन न हो या ज्वलनशील सामग्री मौजूद हो तो आग लगने का खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए चार्जिंग हमेशा सुरक्षित और हवादार स्थान पर करने की सलाह दी जाती है।
लिथियम-आयन बैटरियों में तेजी से पकड़ती है आगः
लिथियम-आयन बैटरियों में लगने वाली आग सामान्य आग से अलग होती है। इनमें 'थर्मल रनवे' नामक प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिसमें बैटरी का तापमान तेजी से बढ़ता है और अंदर रासायनिक प्रतिक्रिया लगातार आग को बढ़ाती रहती है। कई बार आग बुझने के बाद भी बैटरी दोबारा सुलग सकती है। ऐसी आग पर काबू पाने के लिए विशेष तकनीक और अधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है।
सुरक्षित चार्जिंग के लिए जरूरी उपायः
-ई-रिक्शा और ई-स्कूटर के लिए अलग 16 एम्पियर का समर्पित सॉकेट लगाएं।
-बिजली वितरण बोर्ड से अलग कॉपर वायरिंग कराएं।
-16 से 20 एम्पियर का एमसीबी और ओवरलोड सुरक्षा प्रणाली लगाएं।
-उचित अर्थिंग और 30 एमए आरसीडी सुरक्षा अनिवार्य रखें।
-केवल कंपनी द्वारा स्वीकृत चार्जर का उपयोग करें।
-एक्सटेंशन बोर्ड, मल्टी-प्लग और अस्थायी वायरिंग से चार्जिंग न करें।
-एक सॉकेट पर केवल एक ही वाहन चार्ज करें।
-बैटरी को ज्वलनशील वस्तुओं और बंद कमरों में चार्ज न करें।
-चार्जिंग के दौरान बैटरी और चार्जर की समय-समय पर निगरानी करें।
कोट
केवल कंपनी द्वारा स्वीकृत चार्जर का ही उपयोग करें। एक्सटेंशन बोर्ड, मल्टी-प्लग और अस्थायी वायरिंग के जरिए चार्जिंग से बचें। एक सॉकेट पर एक ही वाहन चार्ज करें। चार्जिंग के दौरान बैटरी को बंद कमरे या ज्वलनशील वस्तुओं के पास न रखें। यदि बैटरी में सूजन, अत्यधिक गर्मी, धुआं या किसी प्रकार की क्षति दिखाई दे तो उसका उपयोग तुरंत बंद कर दें। रातभर बिना निगरानी के चार्जिंग भी नहीं करनी चाहिए। -प्रदीप चौबे, सीएफओ, गौतमबुद्धनगर