- पिता का आरोप, विवि के अधिकारियों ने नहीं की कोई मदद
- कहा, बच्चे का हाॅस्टल में रूम तक जला दिया, जान लेने की भी हुई कोशिश
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। बेटे के साथ मारपीट की घटना ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। कभी नहीं सोचा था कि उत्तराखंड से बच्चे को पढ़ने के लिए यूपी भेजेंगे और उसका नाम कटवाना पड़ेगा। गाैतमबुद्व विश्वविद्यालय (जीबीयू) के बारे में बताया गया था कि सरकारी विश्वविद्यालय में सुरक्षा के बेहतर इंतजाम हैं, लेकिन बेटे के साथ 6 से 7 लड़कों ने जिस प्रकार मारपीट की है। उससे सभी प्रकार की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई है। यह व्यथा जीबीयू में एक पिता ने बच्चे को न्याय दिलाने के दौरान बताईं। उन्होंने कहा कि 23 फरवरी को बेटे के साथ मारपीट की गई। मारपीट से बीटेक के दूसरे साल के छात्र ध्रुव पांडेय इतना आहत हो चुके हैं कि वह अब कभी भी विवि नहीं आना चाहते हैं।
पिता सीबीएस पांडेय ने बताया कि बेटा ध्रुव सीएस से बीटेक कर रहा है। बेटे के साथ जब मारपीट हुई तो वह बैडमिंटन खेलने के लिए गया था। उसके साथ मारपीट के बाद हॉस्टल में उसके कमरे में आग भी लगा दी गई। गनीमत यह रही कि ध्रुव कमरे में नहीं था। यदि वह कमरे में होता तो शायद वह आज जिंदा भी नहीं होता। पिता का आरोप है कि उन्होंने चीफ वार्डन से लेकर कुलपति तक से शिकायत की लेकिन उसके बाद भी दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। 1500 रुपये का फाइन लगाकर केवल छोड़ दिया गया। इसके साथ ही बेटे पर भी 500 रुपये का फाइन लगा दिया गया। आरोप है कि कुलपति प्रो राणा प्रताप सिंह ने कहा कि बेटे को अराजक तत्व से दूर रखो। उन्होंने बताया कि अब उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उम्मीद है कि वह बेटे को न्याय दिलाएंगे।
अधिकारी बोले, क्या बच्चों को गोली मार दें : उन्होंने बताया कि जब आरोपियों पर कार्रवाई करने की मांग की तो विवि के अधिकारियों ने कहा कि क्या इन बच्चों को गोली मार दें। शालीन भाषा का भी उपयोग विवि के अधिकारियों की ओर से नहीं किया जा रहा है। दो महीने से अधिक का समय बीत गया है अब तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। हॉस्टल से फोन आ रहा है कि नो डूयस करा लिया जाए। जिससे पूरा खेल खत्म हो जाए।
पिता ने मुलाकात करके शिकायत की है। चीफ प्रोक्टर से मामले की पूरी जानकारी ली गई है। आगजनी की घटना को लेकर कमेटी बनाई जा रही है। विवि में हर छात्र को बेहतर माहौल दिया जा रहा है। - प्रो चंदर कुमार सिंह,कुलसचिव