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Noida News: शेल कंपनियों के जरिए चीन भेजे 11 करोड़, एसटीएफ ने दिल्ली से आरोपी दबोचा

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-भारत में अवैध रूप से रह रहे चीनी नागरिक लियाओ लोंगहुई का साथी है आरोपी
-आरोपी के कब्जे से 8.20 लाख रुपये, विदेशी मुद्रा, क्रेडिट कार्ड और फर्म के दस्तावेज बरामद
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) नोएडा यूनिट ने भारत में अवैध रूप से रहकर कई शेल कंपनियां बनाने और हवाला के जरिए भारतीय मुद्रा विदेश भेजने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान बालोतरा राजस्थान निवासी गणपत लाल राजपुरोहित (30) के रूप में हुई हुई है। एसटीएफ को आरोपी के पास से 8.20 लाख रुपये भारतीय मुद्रा, 100 अमेरिकी डॉलर, 100 थाई बाट, 36 चीनी युआन, एक वीजा आवेदन फॉर्म, एक अतिरिक्त पासपोर्ट आदि सामान बरामद किया है। आरोपी थाना फेज-2 नोएडा में दर्ज एक मुकदमे में वांछित था।
एसटीएफ नोएडा के अपर पुलिस अधीक्षक राज कुमार मिश्र का कहना है कि आरोपी ने दिसंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच प्रथमदृष्टया 11 करोड़ रुपये से अधिक की रकम अवैध रूप से चीन भेजी है। मामले में अब तक कुल चार आरोपी गिरफ्तार करके जेल भेजे जा चुके हैं। सोमवार को टीम ने दिल्ली के करोल बाग इलाके में दबिश देकर गणपत लाल को पकड़ा है।
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हवाला के जरिए भारतीय करेंसी विदेश भेजने की मिल रही थी सूचना: एसटीएफ को लगातार सूचनाएं मिल रही थीं कि विदेशी नागरिक भारत में अवैध रूप से रहकर भारत और चीन में फर्जी कंपनियां बना रहे हैं। इन कंपनियों और हवाला के जरिए बड़ी मात्रा में भारतीय करेंसी अवैध तरीके से विदेश भेजी जा रही है। इस मामले 22 जुलाई 2026 को एसटीएफ की टीम ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट के पूर्वांचल सिल्वर सिटी सोसाइटी से चीनी नागरिक लियाओ लोंगहुई को गिरफ्तार किया था। उसके साथ कंपनी से जुड़े दो भारतीय साथी संजीव कुमार और कौशलेन्द्र भी पकड़े गए थे। तीनों के पास से कई शेल कंपनियों के नाम की विभिन्न बैंकों की चेक बुक और अन्य दस्तावेज मिले थे। लियाओ लोंगहुई ने खुद को भारतीय दिखाने के लिए सैमुअल लोथा नाम का फर्जी भारतीय नाम रखा था। उसके पास से कोहिमा, नागालैंड के पते का आधार कार्ड भी बरामद हुआ था। इस संबंध में थाना फेज-2 में मुकदमा दर्ज किया गया था।

अंडर इनवॉयसिंग से नकदी, फिर चीन तक हवालाः विवेचना में सामने आया कि गणपत लाल राजपुरोहित चीनी नागरिक लियाओ और उसके साथियों के साथ मिलकर काम करता था। अंडर इनवॉयसिंग से नकदी का मतलब है कि किसी सामान की वास्तविक कीमत अधिक होने के बावजूद बिल (इनवॉयस) में उसकी कीमत कम दिखाई जाए और बाकी रकम का लेनदेन बिल के बाहर किया जाए। वह वाईटीएल कंपनी और जेड-वन कंपनी के नाम से बाजार में अंडर इनवॉयसिंग करके नकद रकम हासिल करते थे। इसके बाद गणपत चीन में मौजूद लियाओ की पत्नी मिशेल के साथ मिलकर भारतीय मुद्रा को अवैध रूप से चीन भेजता था। कंपनियों का नियंत्रण लियाओ अपने पास रखता था दिल्ली के करोल बाग में जेड-वन कंपनी के दफ्तर में तैनात कर्मचारियों से नकदी गणपत लाल को दी जाती थी।
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मुंबई से करोल बाग तक का सफर : पूछताछ में गणपत लाल ने बताया कि वह कक्षा 10 तक पढ़ा है। वर्ष 2012 में वह मुंबई में एक ज्वेलरी की दुकान पर काम करता था। वर्ष 2017 में मुंबई से दिल्ली आकर उसने करोल बाग में मोबाइल एक्सेसरीज का काम शुरू किया था। इसी दौरान करोल बाग में उसकी मुलाकात चीनी नागरिक दो महिला मिशेल और सारा से हुई थी। धीरे-धीरे वह उनके हवाला कारोबार से जुड़ गया। दोनों महिलाओं का वीजा खत्म होने के बाद वह चीन लौट गईं, लेकिन गणपत उनके संपर्क में बना रहा। वह टेस्ला नाम से मोबाइल एक्सेसरीज का कारोबार भी करता था। आरोपी वर्ष 2025 और 2026 में चीन भी जा चुका है। मिशेल का पति लियाओ बिना वीजा के अवैध रूप से भारत में रह रहा था । आरोपी गणपत लाल राजपुरोहित के खिलाफ थाना फेज-2 में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उसे जेल भेजा गया है।
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