100 से अधिक बंदर दादों थाने के 53 पुलिस कर्मियों पर भारी पड़ रहे हैं। थाना परिसर में कुछ ऐसे कमरे हैं जिनके बाहर अक्सर बंदर कब्जा जमाए रहते हैं और पुलिस कर्मी उन्हें खोलने से डरते हैं।
पुलिस कर्मियों के अनुसार थाने अंदर खाली पड़ी कुर्सियों में कब्जा जमाने के साथ ही परिसर में खड़े वाहनों में यह बंदर दिन भर उछल-कूद करते हैं। गाड़ियों के कांच तोड़ने के साथ दुपहिया वाहनों की गद्दी फाड़ देते हैं। बिजली के तार तोड़ते हैं। नजर चूकी तो कार्यालय के अंदर और थाना परिसर में बने घरों में घुसकर सामान की तोड़फोड़ करते हैं।
महिला सिपाही प्रियंका ने बताया कि धूप में सुखाने के लिए कपड़े डालने पर अक्सर बंदर उन कपड़ों को उठा ले जाते हैं। कपड़ों को इस तरह फाड़ देते हैं कि वह पहनने लायक नहीं बचते। महिला सिपाही सोनम ने कहा कि बंदरों को पकड़कर थाना परिसर से दूर कर दिया जाए वही अच्छा है। फरियाद लेकर आने वालों पर हमला करते हैं। खासकर महिलाएं इन बंदरों से डरी-सहमी रहती हैं। थाना परिसर में लगे पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
वहीं वन विभाग के रेंजर का कहना है कि यह काम वन विभाग से अलग है। बंदरों को पकड़ने काम निजी कंपनी करती है। इसके लिए संस्थाएं सीधे निजी कंपनियों से बंदरों को पकड़ने के लिए संपर्क करती हैं।