-सीबीआई और पुलिस की जांच में आरोपियों के नाम अलग-अलग, बैंक ने अब तक पुलिस को नहीं सौंपी विभागीय जांच रिपोर्ट
-पुलिस ने बैंक प्रबंधन को पत्र लिखकर मांगी मामले से जुड़ी जानकारी, जवाब मिलने के बाद तय होगी आगे की कार्रवा
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ऐच्छर गांव स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) शाखा में खाताधारकों की रकम में कथित हेरफेर के मामले में पुलिस अब बैंक प्रबंधन से मिलने वाली जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाएगी। बीटा-2 कोतवाली पुलिस की ओर से बैंक को पत्र लिखकर मामले से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। अब तक बैंक प्रबंधन ने पुलिस को न तो अपनी विभागीय जांच रिपोर्ट सौंपी है और न ही मामले में आरोपियों के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराई है। ऐसे में पुलिस के सामने भी जांच को आगे बढ़ाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
दरअसल इस प्रकरण में खाताधारकों की शिकायत पर बीटा-दो कोतवाली पुलिस ने अज्ञात बैंककर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जबकि बैंक प्रबंधन की शिकायत पर सीबीआई ने अलग से केस दर्ज किया है। दोनों जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में अब तक आरोपियों के नाम भी अलग-अलग हैं। सीबीआई ने बैंक की पूर्व कर्मचारी चपरासी दीपांशी शर्मा को मुख्य आरोपी बनाते हुए सात खाताधारकों को भी धनराशि के कथित हेरफेर के मामले में आरोपी बनाया है। वहीं, पुलिस ने पीड़ित खाताधारकों की तहरीर के आधार पर अज्ञात बैंककर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। बैंक की ओर से पुलिस को जानकारी नहीं मिलने के कारण दोनों जांच की दिशा अलग-अलग नजर आ रही है।
छह बैंककर्मियों को किया था निलंबित : बैंक में रकम हेरफेर का मामला सामने आने के बाद 16 अक्तूबर को खाताधारक संगीता की शिकायत पर बैंक प्रबंधन ने विभागीय जांच शुरू कराई थी। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर ऐच्छर शाखा में तैनात तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक निशा तिर्की, वरिष्ठ ग्राहक सेवा सहयोगी संदीप प्रकाश, मीनाक्षी, सतीश कुमार, शैलेंद्र कुमार और लवली जैन को निलंबित किया गया था। हालांकि, सीबीआई को भेजे गए शिकायती पत्र में बैंक प्रबंधन ने इन छह निलंबित कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कराने की मांग नहीं की। इसके बजाय चपरासी दीपांशी को मुख्य आरोपी बताते हुए खाताधारक आशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी के नाम शामिल किए गए। वहीं, पुलिस को बैंक प्रबंधन की ओर से न तो विभागीय जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई और न ही कोई अलग शिकायत दी गई।
छह साल पहले हुई थी मुलाकात: जांच में सामने आया है कि दीपांशी और उसके साथी आशुतोष पाठक की मुलाकात करीब छह साल पहले दादरी की दौलत राम कॉलोनी में हुई थी। आशुतोष दीपांशी के चाचा के मकान में किराये पर रहता था। इसी दौरान दोनों के बीच संपर्क बढ़ा। बताया गया है कि आशुतोष की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह कारोबार शुरू करने के नाम पर दीपांशी से लगातार आर्थिक मदद मांगता था। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकी बढ़ती गई और अब यह संबंध करोड़ों रुपये के कथित बैंक घोटाले की जांच के केंद्र में है।
सुरक्षा गार्ड की तैनाती से बढ़ने लगी थी परेशानी :जांच में यह बात भी सामने आई है कि पीएनबी शाखा में सुरक्षा व्यवस्था के तहत सेवानिवृत्त सैनिक की तैनाती दीपांशी के लिए परेशानी का कारण बनने लगी थी। सुरक्षा गार्ड की मौजूदगी में उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जाने लगी थी। इससे उसे अपने कामकाज के पकड़े जाने का डर सताने लगा था। जांच एजेंसियों के लिए दीपांशी और आशुतोष के मोबाइल फोन अहम साक्ष्य साबित हो सकते हैं।
शुक्रवार को भी खातों में लौटाई गई रकम: उधर खाताधारकों को रकम वापस करने की प्रक्रिया शुक्रवार को भी जारी रही। कई लोगों के खातों में रकम वापस की गई, लेकिन अभी भी सात से आठ खाताधारकों को अपनी पूरी धनराशि लौटने का इंतजार है। बैंक प्रबंधन की ओर से इन्हें शनिवार तक रकम वापस करने का आश्वासन दिया गया है।
विदेश भागने की फिराक में थे दीपांशी और आशुतोष:
जांच में सामने आया है कि बैंक में करोड़ों रुपये के कथित हेरफेर के आरोपी दीपांशी और आशुतोष विदेश भागने की तैयारी में थे। इसके लिए दोनों की ओर से पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही थी। जांच एजेंसियों को आशंका है कि मामले का खुलासा होने और कार्रवाई का डर सताने पर दोनों देश छोड़कर भागने की योजना बना रहे थे। अब जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं ।
पैसा नहीं आने से खाताधारकों की बढ़ी परेशानी: बैंक प्रबंधन की ओर से रकम लौटाने की प्रक्रिया जारी होने के बावजूद अभी भी सात से आठ खाताधारकों के खाते में पैसा वापस नहीं आया है। दिवाली से पहले रकम नहीं मिलने से इन खाताधारकों की चिंता बढ़ गई है। खाताधारकों को बैंक प्रबंधन की ओर से शनिवार तक रकम वापस करने का आश्वासन दिया गया है।