-मारपीट के बाद हुई मौत का मामला, कोर्ट ने कहा सामाजिक जांच रिपोर्ट में नहीं मिला कोई प्रतिकूल तथ्य
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। बाल न्यायालय/विशेष न्यायाधीश की अदालत ने किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) की जमानत अर्जी खारिज करने वाला आदेश रद्द कर दिया। फैसले में कोर्ट ने कहा कि बोर्ड का आदेश रिकॉर्ड पर मौजूद किसी ठोस तथ्य पर आधारित नहीं था। उसमें किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों की अनदेखी हुई।
मामला थाना ईकोटेक-3 में दर्ज है। वादी की तहरीर पर 15 जनवरी 2026 को एफआईआर दर्ज हुई थी। किशोर को भी नामजद किया गया था आरोप है कि 14 जनवरी की रात वादी का छोटा भाई सर्वेश कुमार टेंपो लेकर आया। जैसे ही उसने टेंपो खड़ा किया, पहले से मौजूद आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। सर्वेश के सिर में गंभीर चोट आई और उसका इलाज अस्पताल में चला। इलाज के दौरान 17 जनवरी 2026 को सर्वेश की मौत हो गई थी। किशोर को 24 अगस्त को किशोर न्याय बोर्ड ने विधि-विरुद्ध किशोर घोषित किया था।
अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे लगे कि रिहा होने पर किशोर आपराधिक तत्वों के संपर्क में आएगा। कोर्ट ने जिला परिवीक्षा अधिकारी (डीपीओ) की रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट के मुताबिक घटना दो पक्षों के बीच आपसी विवाद का नतीजा थी। इसके अलावा किशोर के खिलाफ कोई अन्य घटना सामने नहीं आई। मामले के गुण-दोष को आधार नहीं बनाया जाता। इस कारण किशोर को जमानत दी है।