-अखलाक हत्याकांड के 11 साल बाद भी अदालत में आरोपियों की पहचान नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। बिसाड़ा गांव में मोहम्मद अखलाक की मॉब लिचिंग के मामले में करीब 11 साल बाद भी मामले में आरोपियों की अदालत में पहचान नहीं हो सकी है। अखलाक के परिवार की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में आवेदन दाखिल कर अखलाक की पत्नी इकरामन को अदालत में आरोपियों की पहचान करने की अनुमति देने की मांग की है।मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी।
परिवार का कहना है कि वर्ष 2015 के इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाही के दौरान आरोपियों की पहचान नहीं कराई गई। इससे मुकदमे की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया जा सकता है कि अदालत में गवाह द्वारा जिन लोगों का नाम लिया गया है, वह जरूरी नहीं कि मुकदमे का सामना कर रहे वही व्यक्ति हों। परिवार के अधिवक्ता का कहना है कि इकरामन के मुख्य बयान के दौरान आरोपियों की पहचान नहीं कराया जाना एक अनजानी चूक थी। आवेदन में कहा गया है कि इस स्तर पर पहचान कराने से आरोपियों को कोई पूर्वाग्रह नहीं होगा, क्योंकि इकरामन की जिरह अभी शुरू नहीं हुई है। इसके विपरीत पहचान की अनुमति नहीं देने से अभियोजन पक्ष के मामले पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
अखलाक और उनके बेटे दानिश पर हुआ था हमला 28 सितंबर 2015 को बिसाड़ा गांव में मंदिर से यह अफवाह फैलने के बाद कि अखलाक ने गोमांस काटकर घर में रखा है, भीड़ ने उसके घर पर हमला कर दिया था। भीड़ अखलाक को घर से बाहर खींच लाई और उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी। उसके छोटे बेटे दानिश पर भी हमला किया गया था। वह गंभीर रूप से घायल हुआ और सिर की दो सर्जरी के बाद उसकी जान बची थी। पुलिस ने शुरुआत में हत्या, हत्या के प्रयास, घर में घुसने और अन्य धाराओं में 10 आरोपियों को नामजद किया था। बाद में आरोपियों की संख्या बढ़कर 18 हो गई थी। इनमें तीन आरोपी नाबालिग थे।